बांदा में स्कूली बच्चों से जबरन रेत ढुलाई: वायरल वीडियो पर भड़का गुस्सा, BSA ने कहा होगी जांच

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बांदा में स्कूली बच्चों से जबरन रेत ढुलाई: वायरल वीडियो पर भड़का गुस्सा, BSA ने कहा होगी जांच

सारांश

बांदा के एक जूनियर हाई स्कूल में यूनिफॉर्म पहने बच्चों से रेत ढुलाई कराने का वीडियो वायरल हुआ — यह घटना सिर्फ एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जहाँ शिक्षक ही बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन में शामिल बताए जा रहे हैं।

Key Takeaways

बांदा जिले की अछरौंद ग्राम पंचायत के जूनियर हाई स्कूल में बच्चों से कथित तौर पर जबरन रेत ढुलाई कराई गई। वायरल वीडियो महेंद्र ने बनाया, जिनके बच्चे रियांश और रियांशी उसी स्कूल में पढ़ते हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अव्यक्त राम तिवारी ने कहा वीडियो उनके संज्ञान में नहीं था, जाँच का आश्वासन दिया। 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों से काम कराना भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक जूनियर हाई स्कूल के बच्चों को कथित तौर पर जबरन रेत ढुलाई का काम कराया गया। 2 मई को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म पहने छात्र फावड़े और बर्तनों से रेत भरते दिखाई दे रहे हैं। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय स्तर पर व्यापक आक्रोश फैल गया है।

कहाँ और कैसे हुई घटना

यह मामला बांदा जिले की अछरौंद ग्राम पंचायत स्थित जूनियर हाई स्कूल का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में कई बच्चे फावड़े और बर्तनों की सहायता से रेत भरते नज़र आ रहे हैं। आरोप है कि यह काम स्कूल प्रशासन की ओर से कराया गया और इसमें कुछ शिक्षकों की भूमिका भी बताई जा रही है। गौरतलब है कि 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों से काम कराना भारतीय कानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।

वीडियो बनाने वाले पिता ने लगाए गंभीर आरोप

यह वीडियो महेंद्र नामक व्यक्ति ने बनाया है, जिनके बच्चे रियांश और रियांशी उसी जूनियर हाई स्कूल में पढ़ते हैं। महेंद्र ने आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों से जबरन काम कराया जाता है और उनके साथ भेदभाव भी किया जाता है। उन्होंने कहा,

Point of View

जो दर्शाती है कि बाल श्रम निषेध कानून ज़मीनी स्तर पर कितना कमज़ोर है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का यह कहना कि वीडियो उनके संज्ञान में नहीं था, निगरानी तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करता है। असली सवाल यह है कि क्या जाँच का आश्वासन महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा, या दोषी शिक्षकों पर वास्तविक कानूनी कार्रवाई होगी। जब तक जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, ऐसे वीडियो वायरल होते रहेंगे और बच्चों के अधिकार कागज़ों तक सीमित रहेंगे।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

बांदा स्कूल में बच्चों से क्या काम कराया गया?
बांदा जिले की अछरौंद ग्राम पंचायत के जूनियर हाई स्कूल में बच्चों से कथित तौर पर फावड़े और बर्तनों की सहायता से रेत ढुलाई कराई गई। वायरल वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म पहने छात्र यह काम करते दिखाई दे रहे हैं।
वायरल वीडियो किसने बनाया और उनका क्या कहना है?
यह वीडियो महेंद्र नामक व्यक्ति ने बनाया, जिनके बच्चे रियांश और रियांशी उसी स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों से जबरन काम कराया जाता है और उनके साथ भेदभाव भी होता है।
क्या बच्चों से काम कराना कानूनी है?
नहीं, 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों से काम कराना भारतीय कानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत ऐसा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले पर क्या कहा?
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अव्यक्त राम तिवारी ने कहा कि शुक्रवार को सभी स्कूल बंद थे और वायरल वीडियो अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि वीडियो सामने आने पर मामले की जाँच कराई जाएगी और आगे कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद क्या हो सकता है?
जिला शिक्षा अधिकारी ने जाँच का आश्वासन दिया है। सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव और स्थानीय आक्रोश को देखते हुए दोषी शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के खिलाफ विभागीय या कानूनी कार्रवाई की माँग तेज हो रही है।
Nation Press