क्या बिहार में 'बिराजे' महादेव का विराट शिवलिंग स्थापित हुआ?

Click to start listening
क्या बिहार में 'बिराजे' महादेव का विराट शिवलिंग स्थापित हुआ?

सारांश

बिहार में विराट रामायण मंदिर में विशाल शिवलिंग की स्थापना ने धार्मिक आस्था को एक नया आयाम दिया है। नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में भाग लिया। यह शिवलिंग न केवल आकार में विशाल है, बल्कि इसके साथ कई धार्मिक मान्यताएँ भी जुड़ी हुई हैं।

Key Takeaways

  • विराट शिवलिंग का निर्माण स्थानीय धार्मिक आस्था को बढ़ावा देगा।
  • मंदिर का निर्माण कार्य 2030 तक पूरा होगा।
  • शिवलिंग की स्थापना कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने भाग लिया।
  • इस शिवलिंग में 108 छोटे शिवलिंग हैं।
  • यह शिवलिंग विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग है।

मोतिहारी, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में शनिवार को एक भव्य शिवलिंग की स्थापना की गई। इस अवसर पर गाजे-बाजे, ढोल नगाड़ों की थाप और उपस्थित साधु संतों तथा विद्वानों के मंत्रोच्चार के बीच रामायण मंदिर में विराट शिवलिंग स्थापित किया गया। यह शिवलिंग विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बताया जा रहा है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी रामायण मंदिर पहुंचे। देश-विदेश से आए वैदिक पंडितों और विद्वानों के मंत्रोच्चार के बीच स्व. आचार्य किशोर कुणाल के पुत्र स्यान कुणाल और उनकी सांसद पत्नी शाम्भवी चौधरी ने यजमान की भूमिका निभाई। इस विशालकाय शिवलिंग की स्थापना महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा की गई है।

ग्रेनाइट से निर्मित यह 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तैयार किया गया है। 33 फीट ऊंचे शिवलिंग के स्थापित होने के बाद अब मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। शिवलिंग स्थापना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे और इस अद्भुत पल को कैमरे में कैद करते दिखे।

इस अवसर पर स्यान कुणाल ने कहा कि यह मंदिर उनके पिता का सपना था, जो अब धीरे-धीरे साकार होता दिख रहा है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और साल 2030 तक यह भव्य मंदिर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इस मंदिर के निर्माण से न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस विशाल शिवलिंग में 108 छोटे-छोटे शिवलिंग हैं। यही कारण है कि इसे सहस्र शिवलिंगम कहा जा रहा है।

मान्यता है कि इसकी पूजा करने या जलाभिषेक करने से 108 शिवलिंग के जलाभिषेक का फल प्राप्त होगा। यह शिवलिंग तमिलनाडु से 45 दिन की यात्रा के बाद मोतिहारी पहुंचा। इस मंदिर का शिलान्यास आचार्य किशोर कुणाल के नेतृत्व में रखा गया था। विराट रामायण मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे और मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक अन्य शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी।

Point of View

बल्कि यह सम्पूर्ण देश में धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा दे सकती है। स्थानीय नेताओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि धार्मिक आस्था और पर्यटन को एक साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

बिहार में विराट शिवलिंग की स्थापना का महत्व क्या है?
यह शिवलिंग धार्मिक आस्था को मजबूती देने के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देगा।
विराट रामायण मंदिर की विशेषताएँ क्या हैं?
यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा, जिसमें 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे।
शिवलिंग की स्थापना कब की गई?
शिवलिंग की स्थापना 17 जनवरी को की गई।
यह शिवलिंग कहाँ से लाया गया है?
यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 45 दिन की यात्रा के बाद मोतिहारी पहुंचा।
इस शिवलिंग में कितने छोटे शिवलिंग हैं?
इस विशाल शिवलिंग में 108 छोटे-छोटे शिवलिंग हैं।
Nation Press