सीबीआई कोर्ट ने एफसीआई के 11 आरोपियों को भ्रष्टाचार में तीन साल की सजा और 3.3 लाख का जुर्माना लगाया
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई कोर्ट ने 11 आरोपियों को दोषी ठहराया।
- दोषियों को तीन साल की सजा मिली।
- जुर्माना 3.3 लाख रुपए तय किया गया।
- मामला 2006 में दर्ज हुआ था।
- भ्रष्टाचार का मामला एफसीआई से जुड़ा है।
मोहाली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब के एसएएस नगर (मोहाली) स्थित सीबीआई कोर्ट ने एक पुराने भ्रष्टाचार मामले में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 11 आरोपियों को दोषी ठहराया है।
अदालत ने सभी दोषियों को तीन-तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और उन पर कुल 3.3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला 7 अप्रैल 2026 को सुनाया गया।
दोषियों में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के फरीदकोट जिला कार्यालय के तत्कालीन जिला प्रबंधक राजेश रंजन, उप प्रबंधक (क्वालिटी कंट्रोल) आजाद सिंह, सहायक प्रबंधक डीके शर्मा और ज्ञान सिंह शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, मोगा केंद्र के तकनीकी सहायक राज कुमार, आरसी पुरी, गुलाब सिंह, पीतांबर सिंह और जीपीएस कालरा भी दोषी पाए गए हैं। इस मामले में दो निजी व्यक्ति, गोविंद सिंह और प्रदीप बंसल, जो चावल मिलों से जुड़े थे, उन्हें भी सजा सुनाई गई है।
यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 7 जनवरी 2006 को दर्ज किया था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि खरीफ सीजन 2004-05 के दौरान एफसीआई के कुछ अधिकारियों ने चावल मिल मालिकों के साथ मिलकर घोटाला किया। आरोप था कि अधिकारियों ने जानबूझकर घटिया गुणवत्ता वाले चावल को ‘ए’ ग्रेड बताकर स्वीकार किया और उसी आधार पर भुगतान भी कर दिया।
बाद में जब यही चावल अन्य राज्यों में भेजा गया तो कई स्थानों पर उसे या तो अस्वीकार कर दिया गया या घटिया गुणवत्ता के कारण कम श्रेणी में रखा गया। इससे एफसीआई को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। यह पूरा मामला विशेष रूप से फरीदकोट जिले के मोगा डिपो से संबंधित था।
सीबीआई ने विस्तृत जांच के बाद 28 नवंबर 2008 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।