निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री: अब्दुल बारी सिद्दीकी का सकारात्मक मत
सारांश
Key Takeaways
- निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री एक महत्वपूर्ण घटना है।
- अब्दुल बारी सिद्दीकी ने इसे सकारात्मक कदम बताया है।
- राजनीति में नए चेहरों की आवश्यकता है।
- बंगाल एसआईआर पर टीएमसी का विरोध चुनावी राजनीति का हिस्सा है।
- लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ने संसद की गरिमा को उजागर किया है।
पटना, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के निर्णय और उनके पुत्र निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री ने राज्य की राजनीति को एक नई दिशा दी है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने इस संदर्भ में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए निशांत का राजनीति में आना एक सकारात्मक कदम है।
सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि क्या उनके पिता उन्हें राजनीति में लाना चाहते हैं। कई माता-पिता अपने बच्चों को राजनीति से दूर रखना पसंद करते हैं, लेकिन यदि कोई व्यक्ति राजनीति में आना चाहता है, तो वह अवश्य आएगा। वर्तमान स्थिति में यह एक उचित कदम है।
राजद नेता ने बंगाल एसआईआर पर टीएमसी द्वारा किए गए विरोध को लेकर कहा कि यह केवल चुनाव के समय याद आती है। चुनाव से पहले लोग सोते रहते हैं। इसे समय पर सभी जगह लागू करना चाहिए था। कई लोगों के नाम हमारी विधानसभा में काटे गए थे। यदि किसी का नाम पिछले चार-पांच चुनावों से है, तो क्या उसे ‘घुसपैठिए’ कहकर वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि यदि स्पीकर पुरानी परंपराओं का पालन करते, तो उन्हें स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए था।
अब्दुल बारी सिद्दीकी ने यह भी कहा कि हम लोकसभा के सदस्य नहीं हैं, इसलिए वहां की राजनीति की पूरी जानकारी नहीं है। आमतौर पर पार्टी व्हिप ही दिशा निर्धारित करती है। इस सरकार में उल्टी गंगा बह रही है। सरकार का कार्य जनता के लिए होना चाहिए और विपक्ष का कार्य सरकार की कमियों को उजागर करना चाहिए। यदि विपक्ष को ही टारगेट बना दिया जाता है, तो यह उचित नहीं है। संसद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। अविश्वास प्रस्ताव की जीत को मान लें, लेकिन जिन लोगों ने आपके खिलाफ वोट किया, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जनता का क्या मत है। स्पीकर पर जनता की आस्था होती है और स्पीकर उसी अनुसार कार्य करते हैं।