क्या राम मंदिर नहीं जाने वाले नेताओं पर संजय निरुपम ने गंभीर आरोप लगाए?

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क्या राम मंदिर नहीं जाने वाले नेताओं पर संजय निरुपम ने गंभीर आरोप लगाए?

सारांश

शिवसेना नेता संजय निरुपम ने राम मंदिर को लेकर नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि कई नेता मुस्लिम वोटों के डर से राम मंदिर नहीं गए हैं। इस पर उन्होंने अपनी राय व्यक्त की। इस खबर में राजनीति और धार्मिकता के मुद्दों का गहरा संबंध है।

Key Takeaways

  • राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे हुए हैं।
  • संजय निरुपम ने नेताओं पर मुस्लिम वोट के डर से राम मंदिर नहीं जाने का आरोप लगाया।
  • आई-पैक पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं।

मुंबई, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने गुरुवार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय साझा की। राम मंदिर के संबंध में उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को अब दो साल हो चुके हैं। यह देश के करोड़ों हिंदुओं के लिए गर्व और खुशी की बात है, क्योंकि यह एक लंबी कानूनी और सामाजिक लड़ाई के बाद संभव हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रमुख नेता, जो खुद को धार्मिक मानते हैं, आज भी मुस्लिम वोटों के डर से राम मंदिर नहीं गए हैं। निरुपम ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और कुछ हद तक हास्यास्पद बताया।

उन्होंने आगे कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना सही नहीं है।

शंकराचार्य से जुड़े मुद्दे पर संजय निरुपम ने कहा कि वे सभी शंकराचार्यों का सम्मान करते हैं, विशेषकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी उन्हें बहुत आदर देते हैं, और जब महाराष्ट्र में गाय को 'राजमाता' का दर्जा दिया गया था, तब शंकराचार्य ने उन्हें आशीर्वाद दिया था।

प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दौरान हुई घटनाओं पर उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग स्नान के लिए पहुंचे थे और इस दौरान कानून व्यवस्था को संभालना पुलिस की जिम्मेदारी थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि शंकराचार्यों का सम्मान होना चाहिए।

वहीं, आई-पैक को लेकर संजय निरुपम ने कहा कि जो नया खुलासा सामने आया है, वह बेहद विस्फोटक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आई-पैक एक ऐसी संस्था है जो विभिन्न राजनीतिक दलों को रणनीतिक सलाह देती है, उम्मीदवारों के चयन और उनकी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और इसके लिए मोटी रकम भी वसूलती है।

निरुपम ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस को बताया कि पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आई-पैक के दफ्तर पर छापेमारी की थी, जिसके कारण कुछ राजनीतिक दलों ने नाराजगी जताई थी और इसे पार्टी कार्यालय पर हमला बताया था।

अब जो नया मामला सामने आया है, उसके अनुसार आई-पैक ने हरियाणा की एक कंपनी से करीब 13 करोड़ रुपए का अनसिक्योर्ड लोन लिया था। जब जांच की गई तो पता चला कि जिस कंपनी के नाम पर यह लोन दिखाया गया है, वह हरियाणा में अस्तित्व में ही नहीं है। निरुपम ने इसे सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताते हुए कहा कि यह पैसा 'काले से सफेद' करने की कोशिश हो सकती है।

उन्होंने मांग की कि इस मामले में ईडी और पीएमएलए कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और आई-पैक से जुड़े जिम्मेदार लोगों और उनकी पूरी टीम की गहन जांच की जाए।

Point of View

हमें यह समझना आवश्यक है कि राजनीतिक बयानबाजी केवल एक पक्ष की बात नहीं होती। संजय निरुपम द्वारा उठाए गए सवालों में न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान है, बल्कि हमें यह भी याद रखना चाहिए कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में सभी धर्मों की भावनाओं का आदर होना चाहिए।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

संजय निरुपम ने राम मंदिर के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कई नेता मुस्लिम वोटों के डर से राम मंदिर नहीं गए हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
आई-पैक क्या है?
आई-पैक एक रणनीतिक सलाह देने वाली संस्था है, जो राजनीतिक दलों की मदद करती है।
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