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क्या तेलंगाना जिलों के पुनर्गठन के लिए आयोग बनाया जाएगा?

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क्या तेलंगाना जिलों के पुनर्गठन के लिए आयोग बनाया जाएगा?

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जिलों के पुनर्गठन के लिए एक आयोग के गठन की घोषणा की है। यह आयोग रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कार्य करेगा और क्षेत्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर जनता की राय भी इकट्ठा करेगा। क्या यह कदम राज्य में प्रशासनिक सुधार लाएगा? जानें विस्तार से!

मुख्य बातें

जिलों का पुनर्गठन राज्य के प्रशासनिक ढांचे में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण है।
आयोग में विशेषज्ञों का समावेश सुनिश्चित करता है कि सभी दृष्टिकोणों पर विचार किया जाए।
जनता की राय को शामिल करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आयोग की रिपोर्ट से संसदीय चर्चा को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य प्रशासनिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी को बढ़ाना है।

हैदराबाद, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार को यह घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही जिलों के पुनर्गठन हेतु एक रिटायर्ड हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन करेगी।

उन्होंने बताया कि मंडलों, राजस्व डिवीजनों और जिलों के पुनर्गठन की बढ़ती मांगों को ध्यान में रखते हुए, एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों वाला एक आयोग शीघ्र ही नियुक्त किया जाएगा।

यह आयोग विभिन्न जिलों और क्षेत्रों का दौरा करेगा, निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन प्रक्रिया के अनुसार इस मुद्दे का अध्ययन करेगा और जनता की राय भी इकट्ठा करेगा। आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा और विस्तृत चर्चा के बाद, युक्तिकरण के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

तेलंगाना राजपत्रित अधिकारी संघ की डायरी और कैलेंडर का विमोचन करते हुए, मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के शासन में जिलों और मंडलों का मनमाना विभाजन किया गया था।

सरकारी कर्मचारियों के लिए संक्रांति का तोहफा देते हुए, उन्होंने महंगाई भत्ता (डीए) जारी करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि डीए भुगतान से राज्य के खजाने पर हर महीने 225 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने रिटायरमेंट लाभ, स्वास्थ्य सुरक्षा और एसोसिएशन कार्यालयों के निर्माण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही हर सरकारी कर्मचारी के लिए 1 करोड़ रुपए का दुर्घटना बीमा कवर प्रदान करने का निर्णय लेगी।

उन्होंने दोहराया कि रिटायरमेंट लाभ एक कर्मचारी का अधिकार है, और 58 से 61 साल की आयु में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने के बाद मौजूदा रिटायरमेंट परिदृश्य के बारे में जानकारी दी। कर्मचारी लाभों के लिए भुगतान हर महीने किया जा रहा है और अगले वित्तीय वर्ष से इसे और बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी 10 लाख से ज्यादा कर्मचारी सरकार का हिस्सा हैं, और वित्तीय संकट का सामना करने के बावजूद, सरकार उन्हें बिना किसी देरी के वेतन प्रदान कर रही है।

उन्होंने बताया कि जब कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभाली, तो कर्मचारियों के लंबित लाभ 11,000 करोड़ रुपए थे, ठेकेदारों का बकाया 40,000 करोड़ रुपए था, इसके अलावा सिंगरेनी कोलियरीज और बिजली कंपनियों का भी बकाया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को बैंक लोन के अलावा लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपए की लंबित देनदारियां विरासत में मिलीं। कुल मिलाकर, कर्ज का बोझ लगभग 8.11 लाख करोड़ रुपए था।

सत्ता संभालने के तुरंत बाद, सरकार ने विधानसभा में राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र पेश किया। सभी बकाया चुकाने के लिए, हर महीने लगभग 30,000 करोड़ रुपए की आवश्यकता है, जबकि राज्य का मासिक राजस्व लगभग 18,000-18,500 करोड़ रुपए है।

एक मिडिल-क्लास परिवार का उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भी उसी तरह जिम्मेदारी से आगे बढ़ रही है और समस्याओं को धीरे-धीरे ठीक कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह नागरिकों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करती है। आयोग का गठन विभिन्न विशेषज्ञों के सहयोग से किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पुनर्गठन प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी हो।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयोग का गठन कब होगा?
आयोग का गठन जल्द ही किया जाएगा, जैसा कि मुख्यमंत्री ने घोषणा की है।
इस आयोग का प्रमुख कौन होगा?
आयोग का प्रमुख एक रिटायर्ड हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का जज होगा।
आयोग के कार्य क्या होंगे?
आयोग विभिन्न जिलों और क्षेत्रों का दौरा करेगा, जनता की राय इकट्ठा करेगा और पुनर्गठन प्रक्रिया का अध्ययन करेगा।
क्या इस प्रक्रिया से कर्मचारियों को लाभ होगा?
हाँ, यह प्रक्रिया प्रशासनिक सुधार लाने में मदद करेगी, जिससे कर्मचारियों के लाभ में वृद्धि हो सकती है।
आयोग की रिपोर्ट कब विधानसभा में पेश की जाएगी?
आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाएगी और विस्तृत चर्चा के बाद दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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