क्या यूआईडीएआई ने बच्चों के आधार अपडेट को बढ़ावा देने के लिए बीआईटी के साथ साझेदारी की है?
सारांश
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नई दिल्ली, 11 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा मंगलवार को साझा की गई जानकारी के अनुसार, यूआईडीएआई ने रिसर्च कंसल्टेंसी बिहेवियरल इनसाइट्स लिमिटेड (बीआईटी) के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को उनके आधार कार्ड में समय पर आवश्यक बायोमेट्रिक अपडेट प्राप्त करने में सहायता करना है, जिससे वे महत्वपूर्ण सेवाओं तक पहुंच सकें।
इस समझौते पर यूआईडीएआई की डीडीजी तनुश्री देब बर्मा और बीआईटी के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि गुरुमूर्ति ने यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार और अन्य नेतृत्व टीम के सदस्यों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य 5 वर्ष और 15 वर्ष के बच्चों के लिए आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) को बढ़ावा देना है। यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे समय पर अपडेट प्राप्त करें और आधार से संबंधित सेवाओं और लाभों तक निर्बाध पहुंच प्राप्त करें।
मंत्रालय ने बताया कि आधार के बायोमेट्रिक अपडेट को बढ़ावा देने के लिए अनुकूलित व्यवहारिक हस्तक्षेपों को डिजाइन, परीक्षण और कार्यान्वित किया जाएगा।
इस अवसर पर यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा, "जब टेक्नोलॉजी को मानवीय व्यवहार के साथ जोड़ा जाता है, तो डिजिटल पहचान एक तकनीकी प्रक्रिया से बढ़कर एक अधिक सहज, विश्वसनीय और सशक्त अनुभव में बदल जाती है। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से, हम इस प्रभाव को प्राप्त करने की आशा करते हैं।"
बीआईटी की सीईओ रेचल कोयल ने कहा कि मानव व्यवहार की नई साक्ष्य-आधारित समझ से आधार के अपडेट को बढ़ावा मिल सकता है और आधार संख्या धारकों को महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
एक बच्चे के लिए आधार कार्ड में 5 वर्ष की आयु में और फिर 15 वर्ष की आयु में बायोमेट्रिक अपडेट जैसे फिंगरप्रिंट और फोटो को अपडेट कराने की आवश्यकता होती है। यूआईडीएआई ने 7-15 आयु वर्ग के लिए एमबीयू के सभी शुल्क माफ कर दिए हैं, जिससे लगभग 6 करोड़ बच्चों को लाभ होने की उम्मीद है।