क्या लेखक की मेहनत का सम्मान करना ज़रूरी है? अभिनेता जावेद जाफरी का नजरिया

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क्या लेखक की मेहनत का सम्मान करना ज़रूरी है? अभिनेता जावेद जाफरी का नजरिया

सारांश

अभिनेता जावेद जाफरी ने अपने विचार साझा किए हैं कि कैसे सिनेमा में हो रहे बदलाव लेखक की मेहनत का सम्मान करते हैं। उन्होंने फिल्म 'मायासभा' पर चर्चा करते हुए स्क्रिप्ट में बदलाव के बारे में अपनी राय रखी। पढ़ें इस दिलचस्प बातचीत के बारे में।

Key Takeaways

  • लेखक की मेहनत का सम्मान करें।
  • बिना वजह स्क्रिप्ट में बदलाव न करें।
  • डिजिटल और एआई ने सिनेमा को बदल दिया है।
  • दर्शकों का ध्यान केवल 6 सेकंड तक होता है।
  • भारत में स्क्रीन की कमी एक चुनौती है।

मुंबई, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेता जावेद जाफरी जल्द ही सिनेमाघरों में फिल्म 'मायासभा' में दिखाई देंगे। यह फिल्म तुम्बाड के निर्देशक राही अनिल बर्वे की दूसरी कृति है। हाल ही में, जावेद जाफरी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत की और बदलते सिनेमा पर कुछ महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।

अभिनेता ने कहा कि हर अभिनेता को यह ध्यान में रखना चाहिए कि एक लेखक ने फिल्म में कितने वर्षों तक मेहनत की है। यदि किसी डायलॉग या दृश्य में कोई समस्या है, तो सवाल पूछना ठीक है, लेकिन बिना किसी कारण के बदलाव नहीं करना चाहिए। वे इस बात पर जोर देते हैं कि वे निर्देशक द्वारा निर्धारित भूमिका को निभाने का पूरा प्रयास करते हैं।

जावेद ने सिनेमा में हो रहे तीव्र परिवर्तनों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "पहले कोडेक जैसी चीजें कभी खत्म नहीं होती थीं, लेकिन अब डिजिटल और एआई ने सब कुछ बदल दिया है।" उन्होंने यह भी बताया कि आज के दर्शकों का ध्यान केवल 6 सेकंड तक होता है, इसलिए यदि प्रारंभिक 6 सेकंड में उनकी रुचि नहीं पकड़ी गई, तो कंटेंट हटा दिया जा सकता है। चैनल हेड्स और प्लेटफॉर्म इसे गंभीरता से ले रहे हैं।

अभिनेता ने आगे बताया कि प्लेटफॉर्म की संख्या में वृद्धि ने स्क्रिप्ट और कहानी कहने के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने कहा, "वेब सीरीज में 7 से 8 घंटे की कहानी सुनाई जा सकती है, जबकि फिल्म में केवल 1-2 घंटे होते हैं।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आजकल फिल्में एक व्यवसायिक परियोजना बन गई हैं, जहां केवल संख्या महत्वपूर्ण है, लेकिन वे मानते हैं कि अच्छी फिल्में आज भी प्रभाव डालती हैं।

भारत में स्क्रीन की कमी पर जावेद ने कहा कि चीन के पास हमसे कहीं अधिक स्क्रीन हैं। हमारे यहां स्क्रीन कम हैं, इसलिए फिल्में रिलीज़ कैसे होंगी? यह इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती है।

Point of View

जावेद जाफरी का यह बयान सिनेमा के बदलते परिदृश्य को समझने में मदद करता है। लेखक की मेहनत और कहानी की गुणवत्ता को महत्व देना न केवल उद्योग की जिम्मेदारी है, बल्कि दर्शकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह चर्चा एक नए दृष्टिकोण को उजागर करती है।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

जावेद जाफरी का सिनेमा के बारे में क्या कहना है?
जावेद जाफरी ने सिनेमा के बदलावों पर विचार करते हुए कहा कि लेखक की मेहनत का सम्मान होना चाहिए और बिना वजह स्क्रिप्ट में बदलाव नहीं करना चाहिए।
फिल्म 'मायासभा' किसके द्वारा निर्देशित है?
फिल्म 'मायासभा' का निर्देशन राही अनिल बर्वे ने किया है।
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