क्या यामिनी रेड्डी ने कुचिपुड़ी में प्रयोग से हिचकिचाहट नहीं दिखाई?

सारांश
Key Takeaways
- यामिनी रेड्डी का कुचिपुड़ी में योगदान अद्वितीय है।
- उन्होंने परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित किया है।
- उनका समर्पण उन्हें कई पुरस्कार दिला चुका है।
- वे नई पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए सक्रिय हैं।
- उनकी नृत्य संरचनाएं नवोन्मेषी हैं।
मुंबई, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। यामिनी रेड्डी कुचिपुड़ी नृत्य की एक प्रमुख नृत्यांगना हैं। वे प्रसिद्ध नृतक डॉ. राजा रेड्डी और डॉ. राधा रेड्डी की संतान हैं, जिन्होंने कुचिपुड़ी को वैश्विक पहचान दिलाई। बचपन से ही नृत्य की दुनिया में रची-बसी यामिनी ने अपनी कला में परंपरा और आधुनिकता का एक उत्कृष्ट संतुलन स्थापित किया है।
उन्होंने देश-विदेश में अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर प्रदर्शन किया है और अपनी अद्वितीय अभिव्यक्ति, शारीरिक लय और भावनात्मक गहराई से दर्शकों का दिल जीत लिया है। यामिनी रेड्डी केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि एक शिक्षक और प्रेरणा स्रोत भी हैं। वे नई पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की ओर आकर्षित करने और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं।
उनकी पहचान एक ऐसी नृत्यांगना के रूप में है, जो न केवल परंपरा का सम्मान करती हैं, बल्कि नए प्रयोगों के माध्यम से कुचिपुड़ी को समकालीन संदर्भ में जोड़ने का प्रयास भी करती हैं।
यामिनी ने एक बार राष्ट्र प्रेस को बताया था कि स्टेज पर उनकी पहली प्रस्तुति 3 साल की उम्र में हुई थी। उन्होंने साझा किया कि उनके माता-पिता लगातार कुचिपुड़ी का अभ्यास करते रहते थे और देशभर में दौरे पर जाते थे। यामिनी भी बचपन में उनके साथ जाती थीं, और कई बार उन्होंने भी स्टेज पर प्रस्तुति देने की जिद की।
एक प्रदर्शन के दौरान, यामिनी ने हठ करना शुरू कर दिया, जबकि उनके पिता स्टेज पर थे। यामिनी कहती हैं, "मेरे माता-पिता मुझे चुप रहने के लिए कहते थे, लेकिन मैं बहुत परेशान हो गई और स्टेज पर चली गई। दर्शकों ने मुझे नाचने दिया और यही मेरी पहली स्टेज परफॉर्मेंस थी।"
यामिनी ने कहा, "कुचिपुड़ी में प्रसंग, वाचिका अभिनय, संवाद, चरित्र-चित्रण, नाट्यम - ये सभी तत्व कहानी कहने के लिए बहुत उपयुक्त हैं। मैंने सोचा कि मैं एक शाम प्रस्तुत करूं, जहाँ मैं कुचिपुड़ी नृत्य की विशेषताओं का उपयोग कर सुंदर कहानियाँ कह सकूं।"
इसके बाद, उन्होंने कुचिपुड़ी में महारत हासिल की और अपने माता-पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, केवल पारंपरिक नृत्य तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने अपने नृत्य में समकालीन विचारों और विषयों को भी शामिल किया। यामिनी कुचिपुड़ी को एक प्राचीन कला के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी शैली के रूप में देखती हैं जो आज के दर्शकों के साथ जुड़ सकती है।
उनकी नृत्य संरचनाएं अक्सर अद्वितीय होती हैं, जिनमें वे पारंपरिक कुचिपुड़ी को अन्य नृत्य शैलियों और विषयों के साथ मिलाती हैं। उनके इस नवोन्मेषी दृष्टिकोण ने उन्हें विश्वभर में सराहा है। यामिनी ने कई देशों में अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं और दर्शकों का दिल जीता है।
कला के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान दिलाए हैं। यामिनी रेड्डी को संगीत नाटक अकादमी द्वारा बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें युवाओं के लिए रत्न अवार्ड, युवा वोकेशनल एक्सीलेंस अवार्ड, फिक्की युवा प्राप्तकर्ता पुरस्कार और देवदासी राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं। ये सभी सम्मान उनकी कला की गहराई और उत्कृष्टता को दर्शाते हैं।
आज यामिनी रेड्डी केवल एक नर्तकी नहीं, बल्कि एक शिक्षक और कोरियोग्राफर भी हैं। वे अपने माता-पिता द्वारा स्थापित कुचिपुड़ी संस्थान नाट्य तरंगिणी की हैदराबाद शाखा की निदेशक भी हैं, जहां वे छात्रों को प्रशिक्षण देती हैं।