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सोनाली बेंद्रे का कैंसर पर अनोखा नज़रिया: 'यह जंग नहीं थी, अपने शरीर को समझने का सफर था'

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सोनाली बेंद्रे का कैंसर पर अनोखा नज़रिया: 'यह जंग नहीं थी, अपने शरीर को समझने का सफर था'

सारांश

सोनाली बेंद्रे ने माधुरी दीक्षित के शो में खुलासा किया कि कैंसर को उन्होंने कभी लड़ाई नहीं माना — बल्कि यह उनके लिए खुद को समझने का सफर था। उनका यह नज़रिया पारंपरिक 'जीत-हार' की सोच को चुनौती देता है और लाखों मरीज़ों को नई दृष्टि दे सकता है।

मुख्य बातें

सोनाली बेंद्रे ने मराठी क्विज़ शो 'कोण होणार करोडपति' के प्रीमियर में कैंसर अनुभव साझा किया।
उन्होंने कहा कि कैंसर को उन्होंने जंग नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता और सीखने का अवसर माना।
होस्ट माधुरी दीक्षित ने सोनाली के हौसले और हिम्मत की तारीफ की।
सोनाली ने कहा — 'कैंसर सेल्स भी हमारे ही सेल्स हैं, तो हम खुद से ही कैसे लड़ सकते हैं?' सोनाली को 2018 में हाई-ग्रेड कैंसर का पता चला था और उन्होंने न्यूयॉर्क में इलाज करवाया था।

अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने मराठी क्विज़ शो 'कोण होणार करोडपति' के प्रीमियर में शिरकत करते हुए अपने कैंसर से उबरने के अनुभव पर बेबाकी से बात की। इस शो की होस्ट अभिनेत्री माधुरी दीक्षित हैं। 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित इस प्रीमियर इवेंट में सोनाली ने बताया कि उन्होंने कभी भी कैंसर को एक लड़ाई के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे आत्म-जागरूकता और सीखने के एक अवसर के तौर पर लिया।

माधुरी का सवाल और सोनाली का जवाब

शो के दौरान माधुरी दीक्षित ने सोनाली की हिम्मत की सराहना करते हुए कहा, 'आपने जिंदगी में कई अलग-अलग अनुभव देखे हैं और जब आपने कैंसर को मात दी, तब हमने आपका एक नया रूप देखा। हमने आपको एक मजबूत सोनाली के रूप में उभरते हुए देखा।' इस पर सोनाली ने स्पष्ट किया कि उनका दृष्टिकोण पारंपरिक 'जीत-हार' की सोच से बिल्कुल अलग था।

सोनाली ने कहा, 'हम हमेशा कहते हैं कि किसी ने कैंसर पर जीत हासिल कर ली, लेकिन उस वक्त मेरा इरादा इससे उबरने का नहीं था, बल्कि यह समझने का था कि ऐसा क्यों हो रहा है और इससे मैं क्या सीख सकती हूं।' उन्होंने जोड़ा कि इस कठिन दौर से उन्होंने वाकई बहुत कुछ सीखा।

लड़ाई की भाषा पर सोनाली का अलग नज़रिया

सोनाली बेंद्रे ने एक महत्वपूर्ण बात उठाई — कि 'लड़ाई' और 'जीत' जैसी भाषा कभी-कभी व्यक्ति को अपने ही शरीर के विरुद्ध खड़ा कर देती है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि जब हम कहते हैं कि हमने किसी चीज पर जीत हासिल कर ली है, तो कहीं न कहीं ऐसा लगता है जैसे यह एक लड़ाई है। इसमें एक नकारात्मकता आ जाती है और आखिर है तो यह हमारा ही शरीर, है ना? कैंसर सेल्स भी तो हमारे ही सेल्स हैं। तो हम खुद से ही कैसे लड़ सकते हैं?'

यह बयान गौरतलब है क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और कई ऑन्कोलॉजिस्ट भी लंबे समय से यह मत व्यक्त करते रहे हैं कि बीमारी को 'युद्ध' की तरह देखना मरीज पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डाल सकता है।

शरीर से प्यार करने की सीख

सोनाली ने बताया कि इस मुश्किल दौर ने उन्हें अपने शरीर को और गहराई से समझने तथा उससे प्यार करने का मौका दिया। उनके अनुसार, कैंसर के दौरान मिले अनुभव जीवन के प्रति उनकी सोच को और परिपक्व बनाने वाले रहे। उन्होंने माधुरी को संबोधित करते हुए कहा, 'यकीन मानिए, मैंने इससे वाकई बहुत कुछ सीखा और मैंने इसे इसी नज़रिए से देखा।'

सोनाली बेंद्रे का कैंसर सफर

गौरतलब है कि सोनाली बेंद्रे को वर्ष 2018 में हाई-ग्रेड कैंसर का पता चला था, जिसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में अपना इलाज करवाया था। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिए अपने सफर को सार्वजनिक रूप से साझा किया, जिसने लाखों लोगों को प्रेरित किया। उनकी खुलकर बात करने की शैली ने कैंसर जागरूकता के संदर्भ में एक बड़ी भूमिका निभाई। आने वाले समय में 'कोण होणार करोडपति' के प्रसारण के साथ उनकी यह बातचीत और अधिक दर्शकों तक पहुंचेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे 'हार' गए। सोनाली का आत्म-करुणा आधारित नज़रिया मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से कहीं अधिक संतुलित है। मुख्यधारा की मनोरंजन कवरेज जो अक्सर इन बयानों को 'प्रेरणादायक उद्धरण' तक सीमित कर देती है, वह इस गहरे मनोवैज्ञानिक आयाम को नज़रअंदाज़ कर जाती है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनाली बेंद्रे ने कैंसर के बारे में क्या कहा?
सोनाली बेंद्रे ने कहा कि उन्होंने कभी कैंसर को जंग की तरह नहीं देखा, बल्कि इसे अपने शरीर को समझने और उससे सीखने के नज़रिए से देखा। उनके अनुसार 'जीत-हार' की भाषा अपने ही शरीर के साथ एक टकराव पैदा करती है।
'कोण होणार करोडपति' शो क्या है और इसे कौन होस्ट करता है?
'कोण होणार करोडपति' एक मराठी क्विज़ शो है, जिसे अभिनेत्री माधुरी दीक्षित होस्ट कर रही हैं। सोनाली बेंद्रे इस शो के प्रीमियर में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
सोनाली बेंद्रे को कैंसर कब हुआ था?
सोनाली बेंद्रे को वर्ष 2018 में हाई-ग्रेड कैंसर का पता चला था। उन्होंने न्यूयॉर्क में अपना इलाज करवाया था और इस पूरे सफर को उन्होंने सार्वजनिक रूप से साझा किया था।
सोनाली बेंद्रे ने 'लड़ाई की भाषा' पर क्या राय दी?
सोनाली का कहना था कि 'जीत हासिल करना' जैसी भाषा एक नकारात्मकता पैदा करती है, क्योंकि कैंसर सेल्स भी हमारे अपने शरीर का हिस्सा हैं। उनके अनुसार खुद से लड़ने की बजाय खुद को समझना अधिक उपयुक्त नज़रिया है।
सोनाली बेंद्रे के कैंसर अनुभव से लोगों को क्या सीख मिलती है?
सोनाली बेंद्रे के अनुभव से यह सीख मिलती है कि बीमारी को आत्म-करुणा और जिज्ञासा के साथ देखा जा सकता है। उनके अनुसार कठिन दौर में शरीर से प्यार करना और उससे सीखना, उसे दुश्मन मानने से अधिक प्रभावशाली साबित हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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