क्या सुभाष घई ने पुराने दौर का राज खोला? पैसे नहीं दिल के कनेक्शन से बनता था सदाबहार संगीत
सारांश
Key Takeaways
- संगीत केवल पैसे से नहीं, बल्कि भावनाओं से बनता है।
- निर्देशक और संगीतकार के बीच का कनेक्शन आवश्यक है।
- पुरानी यादें आज भी हमारे दिलों में जीवित हैं।
- संगीत में भावनाओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
- संगीत का जादू दिल के कनेक्शनों में है।
मुंबई, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने सोशल मीडिया पर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ एक पुरानी तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर के माध्यम से उन्होंने 80-90 के दशक के सुनहरे संगीत के पीछे का वास्तविक रहस्य उजागर किया।
इंस्टाग्राम पर सुभाष घई ने उल्लेख किया कि किसी फिल्म का संगीत तब तक यादगार नहीं बनता जब तक निर्देशक और संगीतकार के बीच गहरा भावनात्मक तालमेल न हो। उनका कहना है कि “पैसे का लेन-देन नहीं, दिल से दिल का रिश्ता” ही असली जादू लाता है।
फिल्म निर्माता ने साझा किया कि इस पोस्ट की प्रेरणा उन्हें एक वायरल वीडियो से मिली, जिसमें एक 95 साल की बुजुर्ग महिला पूरे सुर और जोश के साथ उनकी सुपरहिट फिल्म 'राम लखन' का प्रसिद्ध गाना 'बड़ा दुख दीना' गा रही थी। यह वीडियो देखकर सुभाष घई इतने भावुक हो गए कि उन्होंने तुरंत प्यारेलाल जी को वीडियो कॉल किया और पुराने दिनों की याद की। दोनों ने उस समय के जुनून और आपसी लगाव को याद किया।
उन्होंने लिखा, "निर्देशक और संगीतकार के बीच का भावनात्मक तालमेल ही फिल्म में बेहतरीन संगीत ला सकता है। पैसे का लेन-देन नहीं। मुझे सोशल मीडिया पर एक वीडियो रील मिली जिसमें 95 साल की गांव की महिला 'बड़ा दुख दीना' गा रही थी, जिससे मुझे प्यारेलाल जी को वीडियो पर कॉल करने और 80-90 के दशक में ऐसा संगीत लाने और भावनात्मक जुड़ाव के बारे में बात करने की प्रेरणा मिली। हमें खुशी हुई।"
सुभाष घई ने अपने पोस्ट में प्यारेलाल के लिए प्रार्थना करते हुए लिखा, “भगवान उन्हें लंबी उम्र और अच्छी सेहत दें।” साथ ही दिवंगत लक्ष्मीकांत जी को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि हम लक्ष्मी जी को भी बहुत याद करते हैं।
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने सुभाष घई के साथ कई सफल फिल्मों में काम किया है। इनकी जोड़ी ने 'राम लखन' के अलावा 'हीरो', 'खलनायक' और 'परदेस' जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में भी काम किया है।