क्या तनाव ने डब्बू मलिक की आवाज को लड़खड़ाने पर मजबूर किया?
सारांश
Key Takeaways
- तनाव से जूझने की कहानी
- संगीत और अभिनय का संघर्ष
- परिवार का महत्व
- आर्थिक तंगियों का सामना
- सफलता की प्रेरणा
मुंबई, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। संगीत की दुनिया में छिपे संघर्षों की कहानियां अक्सर सामने नहीं आतीं। संगीत कंपोजर डब्बू मलिक की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्हें अपने जीवन में एक समय ऐसा अनुभव हुआ जब कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। तनाव के कारण उनकी आवाज चली गई और चेहरे पर तनावपैरालिसिस
डब्बू मलिक ने खुद कहा था कि एक समय ऐसा भी आया जब मनोवैज्ञानिक दबाव के कारण उनकी हालत आंशिक रूप से पैरालिसिस
डब्बू मलिक का असली नाम इसरार सरदार मलिक है। उनका जन्म 21 जनवरी 1963 को मुंबई में हुआ था। वे प्रसिद्ध संगीत निर्देशक सरदार मलिक के पुत्र हैं और गीतकार हसरत जयपुरी उनके मामा थे। उनके परिवार का संगीत से गहरा संबंध था, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि डब्बू का प्रारंभिक झुकाव संगीत की बजाय अभिनय की ओर था। उन्हें कैमरे के सामने रहना पसंद था और इसी कारण उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में की।
डब्बू मलिक ने 'तिरंगा', 'बेटा हो तो ऐसा', 'बाजीगर' और कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों में अभिनय किया। हालांकि, अभिनय में उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जिसकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे संगीत की ओर कदम बढ़ाया। साल 2001 में उनका म्यूजिक एल्बम 'ये जिंदगी का सफर' रिलीज हुआ, जिसे काफी सराहा गया। इसके बाद उन्होंने कई हिंदी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया और इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की।
करियर का यह सफर आसान नहीं था। एक समय ऐसा आया जब डब्बू मलिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। बच्चों अमाल और अरमान को अच्छी संगीत शिक्षा दिलाने के लिए उन्होंने अपनी संपत्ति और निजी सामान तक बेच दिए। इसी तनाव और लगातार असफलताओं ने उनकी सेहत पर गहरा असर डाला।
डब्बू मलिक ने खुलासा किया था कि अत्यधिक स्ट्रेस के चलते वे बोलने में असमर्थ महसूस करने लगे थे। उनकी जुबान और चेहरे के एक्सप्रेशन प्रभावित हो गए थे, जो आंशिक रूप से पैरालिसिस
इस कठिन समय में सलमान खान, सोहेल खान और सलीम खान उनके लिए सहारा बने। डब्बू मलिक ने बताया कि सोहेल खान ने उन्हें भावनात्मक और आर्थिक रूप से संभाला। यह सहायता उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला और फिर से काम पर लौटे।
डब्बू मलिक को भले ही बड़े फिल्म अवॉर्ड्स कम मिले हों, लेकिन वे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बेटे अमाल और अरमान मलिक की सफलता को मानते हैं। उन्होंने हमेशा कहा है कि उनके बच्चों की कामयाबी ही उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।