क्या सोते समय बच्चा बिस्तर पर यूरिन कर देता है? सिर्फ तन की नहीं, मन की भी है परेशानी
सारांश
Key Takeaways
- यूरिन करने की समस्या सामान्य है।
- बच्चों को वॉशरूम जाने की आदत डालें।
- आयुर्वेद के उपायों का प्रयोग करें।
- बच्चों को डांटने से बचें।
- प्यार और समझ से समस्या का समाधान करें।
नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। आमतौर पर 2 से 4 साल के बच्चों में बिस्तर पर यूरिन करने की समस्या देखने को मिलती है। कुछ बच्चे समय के साथ इस पर नियंत्रण पा लेते हैं, लेकिन कुछ बच्चों में 5-7 साल की उम्र के बाद भी बिस्तर पर यूरिन करने की समस्या बनी रहती है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही इस समस्या को तन के अलावा मन से भी जोड़कर देखते हैं।
तो चलिए, इसके पीछे के कारण और इसे कम करने के उपायों के बारे में जानते हैं।
आयुर्वेद में इस समस्या को शय्यामूत्र कहा गया है। यह केवल एक आदत नहीं, बल्कि शरीर और मन दोनों से संबंधित एक विषय माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, बच्चों में बिस्तर पर यूरिन करने की समस्या वात दोष और कफ दोष के असंतुलन के कारण होती है, जिससे नसें कमजोर हो जाती हैं और किसी भी चीज का भार नहीं सहन कर पाती हैं। वात दोष और कफ दोष की वृद्धि से गहरी नींद आती है, जिससे मस्तिष्क इस संकेत को नहीं समझ पाता और बच्चे बिस्तर को गंदा कर देते हैं।
कभी-कभी पाचन की कमजोरी के कारण वात धातु असंतुलित होकर मूत्र नियंत्रण को कमजोर कर देती है।
विज्ञानब्लेडर की कमजोरी, मूत्राशय का सही तरीके से विकसित न होना, गहरी नींद में संकेत न मिल पाना, रात के समय यूरिन का अधिक बनना, कब्ज, यूटीआई और हॉर्मोन के असंतुलन से जोड़ा गया है।
आयुर्वेद में इस समस्या को कम करने के कुछ उपाय बताए गए हैं। पहला है अजवाइन, काले तिल और गुड़ को मिलाकर तैयार करना और इसे दूध के साथ बच्चे को देना। इसके सेवन से नसें मजबूत होती हैं।
दूसरा उपाय है आंवला और शहद का मिश्रण, जिसे दिन में दो बार बच्चे को देना चाहिए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस समय बच्चों को बिल्कुल भी डांटें नहीं और दूसरों के सामने शर्मिंदा न करें। यह समस्या केवल मन की नहीं बल्कि तन की भी है। बच्चों को आदत डालें कि वे रात को सोने से पहले वॉशरूम जरूर जाएं। इसके साथ ही बच्चों को प्यार से समझाएं कि वे अपने शरीर के संकेतों को पहचानें। कई बार बच्चे खेल या नींद में होने के कारण संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो सही नहीं है।