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क्या बांग्लादेश की जातीय पार्टी के कार्यालय को 10 दिनों में दूसरी बार आग लगाई गई?

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क्या बांग्लादेश की जातीय पार्टी के कार्यालय को 10 दिनों में दूसरी बार आग लगाई गई?

सारांश

बांग्लादेश की जातीय पार्टी (जेपीए) के कार्यालय पर हुए हमले की घटना ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। क्या यह केवल एक संयोग है या इसके पीछे गहरी साजिश है? जानें इस हमले के पीछे की सच्चाई और इसकी राजनीतिक अहमियत।

मुख्य बातें

बांग्लादेश की जातीय पार्टी पर हमला राजनीतिक हिंसा का एक नया उदाहरण है।
गोनो अधिकार परिषद पर हमले के लिए आरोप लगे हैं।
राजनीतिक दलों को मिलकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
आगजनी की घटनाएँ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
बांग्लादेश में स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

ढाका, 6 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। स्थानीय मीडिया ने शनिवार को बताया कि बांग्लादेश की जातीय पार्टी (जेपीए) के ढाका स्थित केंद्रीय कार्यालय में उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की और आग लगा दी। यह घटना दस दिन में दूसरी बार हुई है।

यह घटना शुक्रवार देर शाम हुई, जब एक अन्य राजनीतिक दल, 'गोनो अधिकार परिषद', के नेताओं ने राजधानी के शाहबाग में एक रैली का आयोजन किया और जापा पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।

इस घटना की पुष्टि करते हुए, अग्निशमन सेवा और नागरिक सुरक्षा मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष की ड्यूटी ऑफिसर रोजीना अख्तर ने कहा, "हमें शाम लगभग 7:00 बजे सूचना मिली कि कुछ लोगों ने जातीय पार्टी कार्यालय पर ईंट-पत्थर फेंके और फिर उसे आग लगा दी।"

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में बढ़ती राजनीतिक हिंसा के बीच, यह एक सप्ताह के भीतर ऐसा दूसरा हमला है।

बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र, ढाका ट्रिब्यून ने रमना पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर (एसआई) सज्जाद हुसैन के हवाले से कहा, "अचानक, कुछ उपद्रवियों ने जातीय पार्टी कार्यालय पर हमला कर दिया। उन्होंने अंदर कुछ फर्नीचर तोड़ दिया और आग लगा दी।"

जापा महासचिव शमीम हैदर पटवारी ने हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि पार्टी इसके लिए गोनो अधिकार परिषद को जिम्मेदार मानती है।

उन्होंने कहा, "सरकार को इस घटना की न्यायिक जांच करानी चाहिए। अगर दोषी पाया जाता है, तो गोनो अधिकार पार्टी का पंजीकरण रद्द कर दिया जाना चाहिए।"

पत्रकारों को संबोधित करते हुए, जापा प्रेसीडियम के सदस्य रेजाउल करीम ने गोनो अधिकार परिषद पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि शाहबाग में रैली आयोजित करने वालों का ही इस हमले के पीछे हाथ है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार सुरक्षा प्रदान करने और भीड़ के हमलों को रोकने में विफल रही है। उन्होंने कहा, "जातीय पार्टी बांग्लादेश में थी और भविष्य में भी रहेगी।"

हालांकि, गोनो अधिकार परिषद ने इन आरोपों का खंडन किया है।

रिपोर्टों से पता चलता है कि इसी तरह के एक हमले में, जापा के केंद्रीय कार्यालय में 30 अगस्त को तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई, जो ककरैल में उसके कार्यकर्ताओं और गोनो अधिकार परिषद के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पों के एक दिन बाद हुआ था।

उस हमले के बाद, अवामी लीग ने जापा कार्यालय में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की कड़ी निंदा की।

इसने यह भी आरोप लगाया कि यह घटना यूनुस शासन के प्रत्यक्ष समर्थन से हुई, जिसके शासन में बांग्लादेश में भीड़-आतंकवाद बड़े पैमाने पर व्याप्त है।

शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के सत्ता से हटने के बाद से, यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश हिंसा और अत्यधिक अराजकता की चपेट में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश की सामाजिक स्थिरता को भी संकट में डालता है। सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में जातीय पार्टी के कार्यालय पर हमला क्यों हुआ?
यह हमला गोनो अधिकार परिषद की रैली के दौरान हुआ, जिसमें जापा पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
क्या यह हमला पहले भी हुआ था?
जी हां, यह हमला दस दिन में दूसरी बार हुआ है।
इस हमले का राजनीतिक असर क्या होगा?
इस हमले से बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, जिससे लोकतंत्र पर खतरा मंडरा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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