क्या भारत-ईयू एफटीए 'मदर ऑफ ऑल डील्स' है?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या भारत-ईयू एफटीए 'मदर ऑफ ऑल डील्स' है?

सारांश

भारत में माल्टा के उच्चायुक्त रूबेन गौसी ने ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताया। उनका कहना है कि यह समझौता भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देगा। जानें और क्या है इस समझौते की महत्ता।

मुख्य बातें

ईयू-भारत एफटीए को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा गया है।
यह समझौता भारत और यूरोप के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद करेगा।
माल्टा ने भारत से आयात में वृद्धि की आवश्यकता जताई है।
ईयू के पास व्यापार नीति के लिए विशेष अधिकार हैं।
यह समझौता दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर प्रदान करेगा।

नई दिल्ली, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में माल्टा के उच्चायुक्त रूबेन गौसी ने शनिवार को ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर हस्ताक्षर की उम्मीदयूरोपीय यूनियन (ईयू) के नेताओं का आगामी दौरा यह दर्शाता है कि नई दिल्ली यूरोपीय देशों के लिए प्रमुख प्राथमिकता है।

यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के प्रमुख एंटोनियो कोस्टा गणतंत्र दिवस समारोह और ईयू-भारत शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे हैं।

माल्टा के उच्चायुक्त रूबेन गौसी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस के साथ एक विशेष बातचीत में संभावित ईयू-भारत एफटीए को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने भारत-ईयू एफटीए को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा। इस दौरान उन्होंने पिछले साल फरवरी में यूरोपियन कमीशन के प्रतिनिधि स्तर के दौरे का भी उल्लेख किया।

माल्टा के उच्चायुक्त ने इस पर जोर दिया कि इसने ईयू-भारत एफटीए के संबंध में बातचीत को वाकई में आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा, "ईयू अध्यक्ष का भारत में होना यह दर्शाता है कि भारत यूरोपीय देशों के लिए उच्च प्राथमिकता रखता है। जैसा कि ईयू राजदूत इस सप्ताह की शुरुआत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिले। हम समझते हैं कि ईयू भारत के एजेंडा में भी काफी ऊपर है।"

उन्होंने आगे कहा, "एक बार हस्ताक्षर हो जाने के बाद एफटीए इतिहास बना देगा।" उच्चायुक्त ने आगे बताया कि माल्टा, जो २७ ईयू देशों में सबसे छोटे सदस्य देशों में से एक है, भारत के साथ व्यापार को बढ़ाने के लिए एफटीए को एक संभावना के रूप में देखता है।

गौसी ने आगे कहा, "अभी माल्टा भारत से जितना निर्यात करता है, उससे १० गुना ज्यादा भारत से आयात करता है। यह बात समझ में आती है क्योंकि हम एक छोटा देश हैं, लेकिन हम अपने व्यापार घाटे को भी कम करना चाहते हैं। हम बराबरी पर आना चाहेंगे और यह ईयू-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए हो सकता है।"

ईयू के पास कॉमन कमर्शियल पॉलिसी के लिए खास अधिकार है। इसका मतलब है कि सिर्फ ईयू के संस्थान ही नॉन-ईयू देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं।

इसे लेकर माल्टा के उच्चायुक्त ने कहा, "हमारे लिए, जब हमने वह रोल ईयू को दिया तो हमें इस तरह की बातों के लिए ईयू की तरफ देखना होगा। हम ईयू-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बीच बातचीत को तब से फॉलो कर रहे हैं जब से वे शुरू हुए हैं। मुझे उम्मीद है कि एफटीए पर बहुत जल्द हस्ताक्षर किया जाएगा।"

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह दोनों पक्षों के लिए आर्थिक विकास और व्यापार की नई संभावनाएं खोल सकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू एफटीए का क्या महत्व है?
यह समझौता दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा और आर्थिक विकास की संभावनाएं बढ़ाएगा।
क्या यह समझौता जल्द ही हस्ताक्षरित होगा?
हां, उच्चायुक्त रूबेन गौसी ने कहा है कि एफटीए पर बहुत जल्द हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस