क्या एनटीटी डेटा के साथ ट्रायल के बाद जापान में भारत की यूपीआई लॉन्च हो सकती है?
सारांश
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नई दिल्ली, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत का क्यूआर कोड आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) अब अन्य देशों में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जापान उन स्थानों में से एक है जहां भारतीय पर्यटकों के लिए यूपीआई की शुरुआत की जा रही है।
निक्केई एशिया द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि जापान की आईटी सेवा कंपनी एनटीटी डेटा और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) मिलकर वित्तीय वर्ष २०२६ में जापान में यूपीआई का परीक्षण करने की योजना बना रही हैं। इस परीक्षण के दौरान, भारतीय पर्यटक जापान में यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे और धन सीधे उनके भारतीय बैंक खातों से काटा जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों कंपनियाँ जापान और भारत के भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने के तरीकों पर काम कर रही हैं।
यह कदम जापान में आने वाले भारतीय पर्यटकों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। वर्ष २०२५ में लगभग ३.१५ लाख भारतीय पर्यटक जापान आए, जो पिछले वर्ष की तुलना में ३५ प्रतिशत अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, मैकिन्से ने भविष्यवाणी की है कि २०२२ में भारत से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या १.३ करोड़ से बढ़कर २०४० तक ९ करोड़ तक पहुँच सकती है। इसका मुख्य कारण मध्यम वर्ग की आय में वृद्धि और विदेश यात्रा की बढ़ती इच्छा है।
२०१६ में शुरू किया गया यूपीआई, सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है और आज यह लोगों की दिन-प्रतिदिन की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यूपीआई की मदद से एक ही क्यूआर कोड द्वारा विभिन्न भुगतान ऐप्स के माध्यम से धन का लेनदेन किया जा सकता है।
वित्तीय वर्ष २०२४ में यूपीआई लेनदेन में ४२ प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह संख्या १८५.८ अरब तक पहुँच गई। इसके अलावा, जून २०२५ में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बताया।
एनपीसीआई और भारत सरकार अब तक आठ देशों में यूपीआई को लागू कर चुकी है, जिनमें भूटान, सिंगापुर, फ्रांस, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पेरू और नामीबिया जैसे देशों को भी इसी तरह की भुगतान प्रणाली स्थापित करने में सहायता की जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में यूपीआई की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण इसका साझा प्लेटफॉर्म होना है, जिस पर बैंक और फिनटेक कंपनियां अपने भुगतान ऐप विकसित करती हैं।
वर्ष २०२४ में भारत में दुकानों पर होने वाले ५८ प्रतिशत भुगतान यूपीआई के माध्यम से किए गए और अनुमान है कि २०३० तक यह आंकड़ा ७६ प्रतिशत तक पहुँच जाएगा। वहीं, नकद लेनदेन १५ प्रतिशत से घटकर ७ प्रतिशत रह सकता है।
एनटीटी डेटा, जो जापान में व्यापारियों को यूपीआई से जोड़ने की तैयारी कर रही है, पहले से ही भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में भुगतान सेवाएं प्रदान कर रही है। कंपनी की सेवाओं का उपयोग भारत की लगभग ६० लाख दुकानों द्वारा किया जा रहा है, जिसमें ऑनलाइन व्यवसाय भी शामिल हैं।