क्या यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप को आगाह किया है- टैरिफ से बिगड़ेंगे ट्रांसअटलांटिक संबंध और बढ़ेगा तनाव?
सारांश
Key Takeaways
- टैरिफ लगाने से ट्रांसअटलांटिक संबंध कमजोर हो सकते हैं।
- यूरोपीय नेताओं ने अमेरिका की धमकी पर चिंता जताई है।
- बातचीत और समझदारी से समाधान निकालना आवश्यक है।
- ग्रीनलैंड की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
ब्रुसेल्स, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने अमेरिका द्वारा दी गई टैरिफ की धमकी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड से संबंधित इस प्रकार के टैरिफ उपाय यूरोप और अमेरिका के संबंधों को कमजोर कर सकते हैं और स्थिति को धीरे-धीरे एक खतरनाक मोड़ पर ले जा सकते हैं।
दोनों नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि टैरिफ लगाने से ट्रांसअटलांटिक संबंध प्रभावित होंगे और इससे तनाव बढ़ने की संभावना है।
उर्सुला वॉन डर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा ने यह भी कहा कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांत हैं, जो न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोप अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट रहेगा, आपसी सहयोग बनाए रखेगा और पूरी तरह से समर्पित रहेगा।
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका एक फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामान पर दस प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, यदि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो जून की शुरुआत से यह टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
नॉर्डिक देशों के नेता पहले इस धमकी के खिलाफ सामने आए। उन्होंने कहा कि मित्र देशों के बीच किसी भी विवाद को दबाव डालकर नहीं, बल्कि बातचीत और समझदारी से सुलझाया जाना चाहिए।
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने इस टैरिफ धमकी पर हैरानी व्यक्त की और कहा कि डेनमार्क इस मामले में यूरोपीय आयोग के लगातार संपर्क में है।
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। यह डेनमार्क के राजशाही क्षेत्र का स्व-शासित क्षेत्र है, हालाँकि, रक्षा और विदेश नीति से संबंधित निर्णय कोपेनहेगन के नियंत्रण में रहते हैं।
ग्रीनलैंड में अमेरिका का एक सैन्य अड्डा भी मौजूद है। 2025 में पुनः सत्ता में आने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ग्रीनलैंड को “हासिल” करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।