अमेरिका के व्यापार घाटे में कमी में भारत और अन्य व्यापार समझौतों का योगदान: व्हाइट हाउस
सारांश
Key Takeaways
- नए व्यापार समझौते से अमेरिका का व्यापार घाटा कम हुआ है।
- प्रशासन ने टैरिफ नीति के प्रभावों पर जोर दिया है।
- चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले वर्ष की तुलना में 32%25 घटा है।
- अमेरिकी कामगारों की आय में वृद्धि हुई है।
- मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी सुधार देखा गया है।
वाशिंगटन, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के व्हाइट हाउस ने यह घोषणा की है कि भारत समेत कई देशों के साथ किए गए नए व्यापार समझौतों ने अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह वक्तव्य डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति के एक वर्ष पूरे होने पर जारी किया गया, जिसे प्रशासन ने 'लिबरेशन डे' के रूप में मनाया।
व्हाइट हाउस के अनुसार, इन नीतियों के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित बन गई है। प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, "एक वर्ष पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने 'फ्री ट्रेड' के भ्रम को तोड़कर 'अमेरिका फर्स्ट' को प्राथमिकता दी। इसके परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं, जिनमें 20 से अधिक नए व्यापार समझौते, मैन्युफैक्चरिंग में खरबों डॉलर का निवेश, दवाओं की कीमतों में कमी और व्यापार घाटे में गिरावट शामिल है।"
प्रशासन का कहना है कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिका का वस्तु व्यापार घाटा पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत तक घट गया है। खास बात यह है कि नीति में बदलाव के बाद से हर महीने साल-दर-साल आधार पर घाटा कम होता गया है।
आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के 63 प्रतिशत से अधिक व्यापारिक साझेदारों के साथ द्विपक्षीय व्यापार संतुलन में सुधार हुआ है। चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले एक वर्ष में 32 प्रतिशत और अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 46 प्रतिशत तक घट चुका है। व्हाइट हाउस ने बताया कि साल 2000 के बाद पहली बार चीन अब वह देश नहीं रहा, जिसके साथ अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापार घाटा है।
यूरोपीय संघ के साथ भी घाटा लगभग 40 प्रतिशत तक कम हुआ है। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड के साथ अमेरिका ने 2012 के बाद पहली बार वस्तु व्यापार में सरप्लस दर्ज किया है।
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि टैरिफ का कुछ बोझ विदेशी उत्पादक खुद उठा रहे हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया कि अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सामान की कीमतों में गिरावट आई है, जबकि अन्य देशों के लिए कीमतें स्थिर रहीं। इसका अर्थ है कि विदेशी कंपनियां प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए अपने दाम कम कर रही हैं।
प्रशासन के अनुसार, अमेरिका ने भारत, जापान, वियतनाम और अर्जेंटीना जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ 20 से अधिक व्यापार समझौते किए हैं। ये समझौते वैश्विक जीडीपी के आधे से अधिक हिस्से को कवर करते हैं और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करते हुए अमेरिकी कृषि, ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों के लिए नए बाजार खोलते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी तेजी आई है। एप्पल, टोयोटा, माइक्रोन और फाइजर जैसी कंपनियों ने बड़े निवेश किए हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन फिर से अमेरिका में लौट रही है। 2025 में पूंजीगत वस्तुओं की शिपमेंट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि इनका आयात भी कुल आयात में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पर रहा।
2026 की शुरुआत में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में दो वर्ष बाद पहली बार विस्तार हुआ और यह फरवरी-मार्च तक जारी रहा। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक भी 2019 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
स्टील उत्पादन के मामले में भी अमेरिका ने 2025 में जापान को पीछे छोड़ दिया। 1999 के बाद पहली बार चीन और भारत के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक बना।
व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिकी कामगारों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की वास्तविक आय में एक वर्ष में 1,400 डॉलर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण और खनन क्षेत्र में अधिक लाभ हुआ।
प्रशासन ने कहा, "ये नतीजे साबित करते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' व्यापार नीति देश को आर्थिक रूप से मजबूत, समृद्ध और वैश्विक स्तर पर सम्मानित बना रही है।"