क्या इतिहास को याद करके हम शांति की रक्षा कर सकते हैं?

सारांश
Key Takeaways
- इतिहास से सबक लेना महत्वपूर्ण है।
- शांति के बिना विकास असंभव है।
- चीन का शांति के प्रति दृष्टिकोण गहरा है।
- खोंगमिंग कंदील जलाकर शांति की पूजा की जाती है।
- मानवता के साझे भविष्य का निर्माण आवश्यक है।
बीजिंग, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। 3 सितंबर को चीनी जनता के जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध और विश्व फासीवाद विरोधी युद्ध की 80वीं वर्षगांठ है। 80 साल बीत चुके हैं, लेकिन, इतिहास का सबक स्पष्ट बना हुआ है। अतीत में सीखे गए सबक भविष्य में मार्ग-प्रदर्शन कर सकते हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि हम इसलिए इतिहास की याद करते हैं ताकि घृणा जारी रहने के बजाय हर भले व्यक्ति को शांति की आकांक्षा के प्रति जागरूक किया जा सके। हमें इतिहास से सबक लेकर भविष्य के उन्मुख विश्व के साथ शांति को मूल्यवान समझकर उसकी सुरक्षा करनी चाहिए, ताकि वैश्विक जनता हमेशा शांति और अमन चैन का आनंद उठा सके।
चीन में खोंगमिंग कंदील, प्रार्थना करने की कंदील या सुरक्षा की कंदील के नाम से भी जाना जाता है। लोग इसे प्रज्ज्वलित कर अपनी अभिलाषा व्यक्त करते हैं। इस महत्वपूर्ण समय पर हम एक साथ खोंगमिंग कंदील जलाकर राष्ट्र और विश्व की शांति की पूजा करते हैं।
शांति के बिना विकास कभी भी संभव नहीं है। कई हजार वर्षों में शांति चीन राष्ट्र के खून में घुल गई है। चीन हमेशा शांतिपूर्ण रास्ते पर चलेगा और विश्व शांति का निर्माण कर्ता, वैश्विक विकास का योगदानकर्ता और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का संरक्षक बना रहेगा।
चीन शांति के मूल्य को गहराई से समझता है। चीन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ मानवता के भविष्य और जनता के कल्याण का ख्याल रखकर मानवता के साझे भविष्य वाले समुदाय का निर्माण बढ़ाकर एक बेहतर विश्व बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)