क्या मेकांग नदी पर 161वां संयुक्त गश्ती और कानून प्रवर्तन अभियान शुरू हो गया?

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क्या मेकांग नदी पर 161वां संयुक्त गश्ती और कानून प्रवर्तन अभियान शुरू हो गया?

सारांश

मेकांग नदी पर 161वें संयुक्त गश्ती और कानून प्रवर्तन अभियान की शुरुआत हो गई है। यह अभियान चार देशों के कानून प्रवर्तन अधिकारियों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है। जानें इस अभियान का उद्देश्य और क्या प्रभाव होगा मेकांग नदी के आसपास की सुरक्षा पर।

Key Takeaways

  • संयुक्त गश्ती अभियान मेकांग नदी की सुरक्षा को बढ़ावा देगा।
  • चार देशों का सहयोग अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण में मददगार होगा।
  • यह अभियान 2026 के गश्ती कार्यक्रम की तैयारी का संकेत है।

बीजिंग, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 26 जनवरी को सुबह 9 बजे, मेकांग नदी पर 161वें चीन-लाओस-म्यांमार-थाईलैंड संयुक्त गश्ती और कानून प्रवर्तन अभियान के तहत भाग लेने वाले तीन चीनी कानून प्रवर्तन पोत युन्नान प्रांत के शीशुआंगपानना से रवाना हुए। यह अभियान 2026 के मेकांग नदी संयुक्त गश्ती और कानून प्रवर्तन अभियान की शुरुआत का प्रतीक है।

यह अभियान महत्वपूर्ण जलक्षेत्रों में खंडित गश्ती और संयुक्त गश्ती के संयोजन का उपयोग करता है। सभी कानून प्रवर्तन पोत मिलकर निर्दिष्ट जलक्षेत्रों में संयुक्त गश्ती और कानून प्रवर्तन अभियान चलाएंगे।

इस अभियान से पूर्व, चीन, लाओस, म्यांमार और थाईलैंड की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मेकांग नदी बेसिन में सुरक्षा स्थिति और अपराधों से निपटने के लिए एक-दूसरे को जानकारी साझा करने के लिए एक बैठक आयोजित की। इसमें कार्य योजना पर चर्चा की गई और सहमति बनाई गई।

अभियान के दौरान, ये चार देश मेकांग नदी के प्रमुख जलक्षेत्रों में संयुक्त कानून प्रवर्तन अभियान चलाएंगे, अवैध गतिविधियों पर नकेल कसेंगे, और वर्ष के अंत तथा नए साल की शुरुआत में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करेंगे।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

Point of View

जो चार देशों के बीच सुरक्षा और कानून प्रवर्तन को मजबूत करेगा। मेकांग नदी क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

इस अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य मेकांग नदी में अवैध गतिविधियों पर नकेल कसना और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कौन से देश इस अभियान में शामिल हैं?
इस अभियान में चीन, लाओस, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं।
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