क्या पाकिस्तान में असहमति पर पत्रकारों को निशाना बनाना और मोस्ट वांटेड आतंकियों को संरक्षण मिल रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान में पत्रकारों पर दबाव बढ़ रहा है।
- आतंकवादी संगठन बेखौफ होकर सक्रिय हैं।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस समस्या पर आवश्यक है।
वॉशिंगटन, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में राज्य संस्थानों की आलोचना करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए कानूनी ढांचे का बढ़ते हुए दुरुपयोग किया जा रहा है। इन्हें जांच के नाम पर बुलाया जाता है और जेल में डाला जाता है। दूसरी ओर, असली आतंकवादी बेखौफ होकर फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने और जिहाद के नाम पर हिंसा, जातीय सफाया, आतंकवाद, साम्राज्यवाद और क्षेत्रीय विस्तारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
अमेरिकी मीडिया प्लेटफार्म पीजे मीडिया में तुर्की की पत्रकार उजाय बुलुत ने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा पाकिस्तान को “रणनीतिक, प्रमुख नॉन-नाटो सहयोगी” मानना दर्शाता है कि दक्षिण एशिया में पश्चिम की विदेश नीति कितनी भ्रमित और तथ्यहीन है।
बुलुत ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने आठ पत्रकारों और सोशल मीडिया टिप्पणीकारों को अनुपस्थिति में आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ये आरोप जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में की गई ऑनलाइन गतिविधियों से संबंधित हैं।
इसके विपरीत, रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में जिहाद और हिंसा की खुलेआम वकालत करने वाले आतंकवादी आज़ादी से घूम रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी संगठनों के नेता और सदस्य खुले तौर पर जिहाद समर्थक प्रचार करते हैं और देशभर में ऐसे आयोजन करते हैं।
बुलुत के अनुसार, आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर ने पिछले साल 2 नवंबर को एक इज्तिमा (इस्लामी सम्मेलन) को संबोधित किया। अपने भाषण में उसने लोगों से ‘कुरान की रोशनी में जिहाद में शामिल होने’ की अपील की।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों, विशेषकर जैश-ए-मोहम्मद, की गतिविधियों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। जैश ए मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और इनके मुखौटा संगठनों द्वारा देशभर में प्रशिक्षण सत्र, बैठकें, कार्यशालाएं और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि “इन आयोजनों के दौरान खुलेआम जिहाद समर्थक और भारत विरोधी बयान दिए जाते हैं, और प्रतिभागियों का और अधिक कट्टरपंथीकरण किया जाता है। इन आतंकवादी संगठनों के नेता और प्रतिनिधि मस्जिदों में भी उपदेश देते हैं।”