नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर ट्रंप का तीखा हमला, समिति के फैसले को बताया 'स्थायी दाग'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अक्टूबर 2026 को नॉर्वे की नोबेल शांति पुरस्कार समिति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने आठ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाई, फिर भी उन्हें यह सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने इस निर्णय को 'स्थायी दाग' और अमेरिका के साथ 'अन्याय' करार दिया।
रैली में ट्रंप का विस्फोटक बयान
न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में शुक्रवार को आयोजित एक रिपब्लिकन चुनावी रैली में ट्रंप ने समर्थकों से कहा, 'संयुक्त राज्य अमेरिका, जिसका प्रतिनिधित्व मैं राष्ट्रपति के रूप में कर रहा हूँ, को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था, लेकिन नहीं मिला।' उन्होंने दावा किया कि जिन संघर्षों को सुलझाने में उनका योगदान रहा, उनमें से प्रत्येक के लिए अलग-अलग नोबेल शांति पुरस्कार दिया जा सकता था।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि नोबेल समिति ने पुरस्कार चयन में राजनीतिक सोच को हावी होने दिया और उनकी कथित कूटनीतिक उपलब्धियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। उन्होंने यह भी कहा कि 2026 का पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति के बारे में वह अधिक नहीं जानते।
किन संघर्षों का किया ट्रंप ने दावा
ट्रंप ने अपने भाषण में कई क्षेत्रीय विवादों का उल्लेख किया जिनमें उनके प्रशासन ने कथित तौर पर समाधान की दिशा में भूमिका निभाई। इनमें कोसोवो-सर्बिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य-रवांडा, आर्मेनिया-अजरबैजान, मिस्र-इथियोपिया और इजरायल-हमास के बीच के विवाद शामिल थे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका और क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका को टालने में योगदान दिया। साथ ही उनका कहना था कि उनका प्रशासन अब रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान से जुड़े तनाव को भी समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है।
ईरान को फिर चेतावनी
रैली के दौरान ट्रंप ने तेहरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को अमेरिका की शर्तें माननी होंगी, अन्यथा उसे आगे और गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की भी आलोचना की और कहा कि जिन संघर्षों को सुलझाने का वह दावा करते हैं, उनमें संयुक्त राष्ट्र की भूमिका नगण्य रही।
चुनावी संदर्भ और राजनीतिक पृष्ठभूमि
ट्रंप की यह टिप्पणी 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी संसदीय चुनावों से कुछ ही सप्ताह पहले आई है। रैली में उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन के साथ-साथ अपनी सरकार की आर्थिक, आव्रजन और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों का भी जोरदार बचाव किया।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर असंतोष जताया हो। इससे पहले भी उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान इस पुरस्कार की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए थे। उनके समर्थकों ने उन्हें पूर्व में कई बार नोबेल के लिए नामांकित भी करवाया था।
नोबेल समिति कैसे लेती है निर्णय
नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे की संसद द्वारा नियुक्त पाँच सदस्यीय स्वतंत्र नोबेल समिति की ओर से दिया जाता है। यह सम्मान उन व्यक्तियों और संगठनों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संघर्ष समाधान में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। समिति स्वतंत्र रूप से काम करती है और किसी भी सरकार या राजनीतिक दबाव से मुक्त मानी जाती है। आने वाले हफ्तों में ट्रंप के इन बयानों और आगामी अमेरिकी संसदीय चुनावों के बीच के संबंध पर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र बनी रहेगी।