क्या मीनाक्षी देवी का यह भव्य मंदिर वास्तव में 2 हजार साल पुराना है?

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क्या मीनाक्षी देवी का यह भव्य मंदिर वास्तव में 2 हजार साल पुराना है?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि श्री मीनाक्षी अम्मन मंदिर 2 हजार साल पुराना है? यह मंदिर मात्र धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि द्रविड़ वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। आइए जानते हैं इस मंदिर की रोचक कहानियाँ और विशेषताएँ।

Key Takeaways

  • मीनाक्षी मंदिर का इतिहास 2000 साल पुराना है।
  • यह द्रविड़ वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है।
  • यहाँ हर साल हजारों भक्त आते हैं।
  • 14 विशाल गोपुरम इस मंदिर की खासियत हैं।
  • मंदिर में म्यूजिकल पिलर हैं जो संगीत निकालते हैं।

मदुरै, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विभिन्न हिस्सों में ऐसे मंदिर मौजूद हैं, जिन्हें देखकर मन में अद्भुतता का अनुभव होता है। तमिलनाडु के मदुरै में स्थित श्री मीनाक्षी अम्मन मंदिर भी एक ऐसा ही स्थान है। यह मंदिर 2 हजार साल से भी अधिक पुराना है, जहाँ माता पार्वती का रहस्यमयी रूप देखने को मिलता है।

श्री मीनाक्षी अम्मन मंदिर कोई साधारण मंदिर नहीं है, यह एक जीवंत इतिहास है, प्रेम की महाकविता है और द्रविड़ वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण है। यहाँ हर वर्ष बड़ी संख्या में भक्त माता पार्वती के दर्शन के लिए आते हैं।

तमिलनाडु पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इस मंदिर के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। श्री मीनाक्षी अम्मन मंदिर को देश के प्रमुख मंदिरों में गिना जाता है। यह देवी मीनाक्षी और भगवान सुन्दरेश्वर (शिव) को समर्पित है और धार्मिक पुस्तकों में इसका उल्लेख मिलता है।

कहा जाता है कि मदुरै की यात्रा के दौरान देवराज इंद्र को यहाँ एक स्वयंभू शिवलिंग मिला था, जिसे उन्होंने स्थापित किया। 1310 में यह मंदिर पूर्ण रूप से नष्ट हो गया था, लेकिन 14वीं सदी में इसे फिर से भव्यता प्रदान की गई। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसके 14 विशाल गोपुरम (टावर) हैं, जो लगभग 50 मीटर ऊँचे हैं और जिन पर हजारों रंग-बिरंगी मूर्तियाँ उकेरी गई हैं।

मंदिर में 1000 खंभों वाला एक हॉल है, जिसमें कुछ खंभे छूने पर संगीत की ध्वनि निकालते हैं, जिन्हें म्यूजिकल पिलर कहा जाता है। मंदिर परिसर के बीच में एक बड़ा पवित्र तालाब है और दीवारों पर सुंदर चित्र बने हैं, जो भगवान शिव की 64 लीलाओं की कहानियों का वर्णन करते हैं। मीनाक्षी देवी की आँखें मीन के समान हैं।

हर वर्ष अप्रैल-मई में चिथिरई ब्रह्मोत्सव में देवी मीनाक्षी और सुन्दरेश्वर का दिव्य विवाह का आयोजन होता है, जिसे देखने के लिए हजारों भक्त आते हैं। नवरात्रि, अवनी मूलम और मासी मंडला जैसे त्योहार भी धूमधाम से मनाए जाते हैं।

मंदिर में एक म्यूजियम भी है जिसमें पुरानी मूर्तियाँ, सिक्के, चित्र और शक्ति के आठ रूपों की मूर्तियाँ रखी गई हैं।

अब सवाल है कि यहाँ कैसे पहुँचा जाए, तो मदुरै एयरपोर्ट पहुँचने के बाद आप मीनाक्षी मंदिर के लिए टैक्सी या कैब बुक कर सकते हैं। वहीं, मदुरै रेलवे स्टेशन सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है।

Point of View

बल्कि इतिहास, कला और आस्था का संगम है।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

मीनाक्षी मंदिर कहाँ स्थित है?
मीनाक्षी मंदिर तमिलनाडु के मदुरै में स्थित है।
यह मंदिर किस देवी को समर्पित है?
यह मंदिर देवी मीनाक्षी और भगवान सुन्दरेश्वर को समर्पित है।
मंदिर की विशेषता क्या है?
मंदिर में 14 विशाल गोपुरम और 1000 खंभों वाला एक हॉल है।
कब यहाँ ब्रह्मोत्सव मनाया जाता है?
हर साल अप्रैल-मई में चिथिरई ब्रह्मोत्सव मनाया जाता है।
मंदिर में कैसे पहुँचें?
आप मदुरै एयरपोर्ट या मदुरै रेलवे स्टेशन से टैक्सी या कैब बुक कर सकते हैं।
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