क्या अखिलेश यादव ने एसआईआर का असली उद्देश्य बताया?
सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव ने एसआईआर पर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- भाजपा की नीतियों में पारदर्शिता की कमी है।
- राजनीतिक लाभ के लिए मतदाता सूची का दुरुपयोग किया जा सकता है।
कोलकाता, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भाजपा पर आरोप लगाए।
अखिलेश यादव ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया का उद्देश्य वोटरों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे घटाना है। उन्होंने चुनाव आयोग से अपेक्षा की कि वह निष्पक्षता के साथ काम करे, लेकिन वर्तमान में आयोग का व्यवहार इस दिशा में नहीं दिखता।
उन्होंने दावा किया कि जहां-जहां भाजपा हार रही है, वहां एसआईआर के तहत मतदाताओं के नाम हटा दिए जा रहे हैं। ये लोग नफरत और विभाजन पैदा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि पश्चिम बंगाल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां से यह संदेश गया था कि हम एकजुट हैं। दीदी को ईडी ने हरा दिया है, और भाजपा को यहां सफलता नहीं मिलने वाली है। उनकी हार सुनिश्चित है।
उन्होंने कहा कि भाजपा का एक समय था, जब ये लोग मुख्यमंत्री आवास को गंगा जल से धो रहे थे। क्या ये बातें भारत में संभव हैं? इनकी विभाजनकारी राजनीति सफल नहीं होगी। इस बार भाजपा को पश्चिम बंगाल में हार का सामना करना पड़ेगा।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के लोग कितने समझदार हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अगर पश्चिम बंगाल में एक करोड़ वोट कटे हैं तो उत्तर प्रदेश में चार करोड़ वोट कटे हैं। ये लोग डिजिटल इंडिया का सपना देख रहे हैं, लेकिन आज की तारीख में अपने एप को भी समझ नहीं पा रहे। अब सवाल यह है कि उन्हें तकनीकी सहायता कौन दे रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को हिंदू धर्म से कोई संबंध नहीं है। शंकराचार्य के साथ पुलिस का व्यवहार क्या था। उनकी रथ को पुलिस ने धक्का दिया, क्योंकि सरकार हर चीज को अपने तरीके से चलाना चाहती है। इससे पूरा देश दुखी है।