क्या पांडवों ने एक रात में अंबरनाथ मंदिर का निर्माण किया था?
सारांश
Key Takeaways
- अंबरनाथ मंदिर एक रात में पांडवों द्वारा निर्मित किया गया।
- यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी वास्तुकला अद्वितीय है।
- कुंड का पानी हमेशा गर्म रहता है, जो इसे विशेष बनाता है।
- शिवरात्रि पर यहाँ बड़ा मेला लगता है।
- यूनेस्को ने इसे सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया है।
नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू धर्म में महाभारत और रामायण के प्रमाण न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी देखे जा सकते हैं। दक्षिण भारत में महाभारत काल के कई प्रमाण मिलते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं उस मंदिर के बारे में जिसे पांडवों ने एक रात में बनाया था और जिसे अधूरा छोड़ दिया गया था? हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के मुंबई के निकट स्थित अंबरनाथ मंदिर की, जो भगवान शिव को समर्पित है।
अंबरनाथ मंदिर, जो भगवान शिव के लिए समर्पित है, अपनी मान्यताओं के साथ-साथ अपनी अद्वितीय वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर मोटे पत्थर पर भगवान शिव के विभिन्न रूपों को उकेरा गया है, साथ ही भगवान गणेश और कार्तिकेय की भी मूर्तियां हैं। दीवारों पर मां भवानी द्वारा राक्षसों का संहार करते हुए भी चित्रित किया गया है। गर्भगृह के पास एक कुंड भी है, जहां दो विशाल नंदी महाराज पहरेदार की तरह विराजमान हैं।
कुंड की खासियत यह है कि इसका पानी हमेशा गर्म रहता है और किसी भी मौसम में सूखता नहीं है। मुख्य गर्भगृह तक पहुँचने के लिए नौ सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जहाँ भगवान शिव त्रैमस्ति रूप में विराजमान हैं। इस रूप को मां पार्वती और भगवान शिव का एकल रूप माना जाता है। इस हजार साल पुराने मंदिर को यूनेस्को द्वारा सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया गया है।
मंदिर के भीतर एक रहस्यमय गुफा भी है, जिसे माना जाता है कि इसका रास्ता पंचवटी जाता है। इस मंदिर की विशेष वास्तुकला को देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी यहाँ आते हैं। भगवान शिव के अंबरनाथ स्वरूप को इच्छापूर्ति स्वरूप माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां आकर मांगी गई हर मुराद भगवान शंकर पूरी करते हैं।
कहा जाता है कि यहाँ भगवान शिव को पांडवों ने स्थापित किया था। यह विश्वास है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इस स्थान पर कुछ समय के लिए रुके थे और एक रात में इस मंदिर का निर्माण किया था। मंदिर का कुछ हिस्सा अधूरा रह गया, जिसे कौरवों द्वारा पकड़े जाने के डर से छोड़ना पड़ा। शिवरात्रि के अवसर पर मंदिर के पास चार दिन का मेला भी लगता है, जहाँ दूर-दूर से भक्त अपनी इच्छाओं के साथ आते हैं।