आंध्र प्रदेश ने 5 ई-मोबिलिटी शहरों की अधिसूचना जारी की, ₹250 करोड़ के कोष से 2047 तक कार्बन तटस्थता का लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
आंध्र प्रदेश सरकार ने 1 मई 2026 को राज्य के पाँच मॉडल ई-मोबिलिटी शहरों की आधिकारिक अधिसूचना जारी की — यह कदम आंध्र प्रदेश सतत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी नीति (4.0) 2024-29 के कार्यान्वयन की दिशा में एक निर्णायक पहल है। राज्य का दीर्घकालिक लक्ष्य 2047 तक परिवहन क्षेत्र में कार्बन तटस्थता हासिल करना है, और यह अधिसूचना उसी रणनीति की पहली ठोस कड़ी मानी जा रही है।
पाँच शहर, पाँच क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व
चिन्हित पाँच मॉडल ई-मोबिलिटी शहर राज्य के अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों से लिए गए हैं। उत्तरी आंध्र से विशाखापत्तनम, गोदावरी क्षेत्र से राजमुंद्री, मध्य आंध्र से विजयवाड़ा, दक्षिणी आंध्र से नेल्लोर और रायलसीमा से तिरुपति को इस योजना में शामिल किया गया है। इस भौगोलिक विविधता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ई-मोबिलिटी का लाभ किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रहे।
₹250 करोड़ का समर्पित कोष और परिचालन ढाँचा
सरकार ने इस पहल के लिए ₹250 करोड़ का समर्पित कोष निर्धारित किया है, जिसमें प्रत्येक मॉडल शहर को ₹50 करोड़ आवंटित किए जाएँगे। यह राशि ईवी चार्जिंग अवसंरचना तैनाती, ग्रिड सुदृढ़ीकरण, बेड़े के विद्युतीकरण, नवाचार पायलट परियोजनाओं, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण और उपभोक्ता अपनाने की पहलों पर खर्च की जाएगी। नगर प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग ने शहरी स्थानीय निकायों (ULB) में नीति के कार्यान्वयन हेतु परिचालन ढाँचे और रणनीतिक रोडमैप को पहले ही मंजूरी दे दी है।
बुनियादी ढाँचे में क्या-क्या शामिल होगा
परिचालन रूपरेखा के अनुसार, चिन्हित शहरों में उच्च घनत्व वाले ईवी चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, हरित मार्ग, शून्य उत्सर्जन क्षेत्र (ZEZ), ग्रीन फ्रेट कॉरिडोर, इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, स्मार्ट शहरी गतिशीलता योजना और समर्पित सिटी ई-मोबिलिटी सेल (CEMC) स्थापित किए जाएँगे। यह ढाँचा चरणबद्ध और एकीकृत कार्यान्वयन पर आधारित है।
शहर-विशिष्ट हस्तक्षेप योजनाएँ
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रत्येक शहर के लिए अलग-अलग प्राथमिकताएँ तय की गई हैं। विशाखापत्तनम में हरित पर्यटन गतिशीलता, इलेक्ट्रिक BRTS कॉरिडोर और हरित माल ढुलाई कॉरिडोर विकसित होंगे। विजयवाड़ा में BRTS के साथ मॉडल ग्रीन रूट और लॉजिस्टिक्स-केंद्रित ईवी बुनियादी ढाँचा प्रस्तावित है। राजमुंद्री में नदी परिवहन प्रणालियों और हरित माल गलियारों का विद्युतीकरण होगा। नेल्लोर में मत्स्य पालन और तटीय परिवहन के लिए ईवी लॉजिस्टिक्स प्रणालियाँ लागू की जाएँगी। तिरुपति में तिरुमाला शटल प्रणालियों का पूर्ण विद्युतीकरण और शून्य उत्सर्जन तीर्थयात्री गतिशीलता क्षेत्र स्थापित किए जाएँगे।
व्यापक लक्ष्य और आगे की राह
गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत के कई राज्य ईवी नीति की दिशा में प्रतिस्पर्धात्मक रूप से आगे बढ़ रहे हैं। आंध्र प्रदेश का यह कदम राज्य को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अपनाने, ईवी अवसंरचना विकास, हरित शहरी परिवहन और सतत शहरी नियोजन में भारत के अग्रणी केंद्रों में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा रखता है। नीति के क्रियान्वयन की निगरानी राज्य स्तरीय तंत्र के ज़रिए होगी, जिसमें CEMC की भूमिका केंद्रीय होगी।