क्या एसआईआर का उद्देश्य अवैध घुसपैठ पर अंकुश लगाना है?
सारांश
मुख्य बातें
गुवाहाटी, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को राज्य में मतदाता सूची के विशेष संशोधन पर चल रही चर्चा का दृढ़ता से उत्तर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की यह कार्रवाई अवैध घुसपैठ और बढ़ती जनसंख्या के दबाव से संबंधित जनता की चिंताओं से प्रेरित है, न कि किसी विशेष समुदाय के खिलाफ।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा की गई आलोचना का सामना करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के लोगों में अवैध अप्रवासन को लेकर गहरी चिंता है, जो कि स्वदेशी असमिया समुदायों की पहचान, संस्कृति और सीमित संसाधनों के लिए गंभीर खतरा है।
उन्होंने कहा कि राज्य भर में जो विरोध हो रहा है, वह किसी धार्मिक या भाषाई समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि बांग्लादेशी अवैध घुसपैठ के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के लोग अपनी भूमि, संस्कृति और भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट हैं। यह कोई धर्म का संघर्ष नहीं है, बल्कि असमिया नागरिकों और अवैध घुसपैठियों के बीच एक स्पष्ट विभाजन है। उन्होंने यह भी बताया कि असमिया लोग, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, इस मुद्दे पर एकजुट हैं।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार असम की पहचान से कोई समझौता नहीं करेगी और संविधान एवं कानून के दायरे में रहकर दृढ़ता से कार्य करना जारी रखेगी।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी लोगों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरमा ने कांग्रेस नेताओं द्वारा चुनावी जीत के दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि ये दावे विश्वसनीय नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर असम की जनता की वास्तविक चिंताओं, विशेषकर अवैध अप्रवासन के संवेदनशील मुद्दे को लगातार अनदेखा करने का आरोप लगाया, जिसके कारण पार्टी राज्य में जनता का विश्वास खो रही है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों का विशेष संशोधन चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि सटीक और अपडेट मतदाता सूचियां स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के लिए आवश्यक हैं।