क्या असम राइफल्स ने अगरतला में आदिवासी छात्रों के लिए ड्रोन डिस्प्ले आयोजित किया?
सारांश
Key Takeaways
- असम राइफल्स ने आदिवासी छात्रों के लिए ड्रोन डिस्प्ले आयोजित किया।
- कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को तकनीक के बारे में जागरूक करना था।
- छात्रों ने ड्रोन के लाइव प्रदर्शन देखे।
- यह पहल सेना और आम लोगों के बीच भरोसा बढ़ाने का प्रयास है।
- असम राइफल्स लगातार ऐसी अनोखी पहलें करता रहता है।
अगरतला, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम राइफल्स ने रविवार को अगरतला में आदिवासी छात्रों के लिए एक विशेष ड्रोन डिस्प्ले का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को तकनीक के प्रति जागरूक करना और उन्हें यह दिखाना था कि आज के समय में ड्रोन सैन्य अभियानों में कितने महत्वपूर्ण हैं।
इस संबंध में असम राइफल्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करके बताया, "टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूकता और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, असम राइफल्स ने पश्चिम त्रिपुरा जिले के आदिवासी छात्रों के लिए ड्रोन डिस्प्ले का आयोजन किया।"
उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम त्रिपुरा के १० स्कूलों के कुल ४७९ छात्रों और २४ शिक्षकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान छात्रों को नई पीढ़ी के कई प्रकार के ड्रोन दिखाए गए, जिनमें आधुनिक युद्ध, जासूसी, निगरानी और लॉजिस्टिक्स में उनके उपयोग पर प्रकाश डाला गया। छात्रों ने ड्रोन के लाइव ऑपरेशन देखे और उन्हें उनके तकनीकी पहलुओं, ऑपरेशनल महत्व और आज के समय में सैन्य अभियानों में बढ़ते महत्व के बारे में बताया गया।
इससे पहले, असम राइफल्स ने मणिपुर के सेनापति जिले के संगकुंगमई में 'कंपनी कमांडर के साथ एक दिन' का आयोजन भी किया था। इसका लक्ष्य युवाओं और ग्रामीणों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना और उन्हें सेना की गतिविधियों से परिचित कराना था।
इस कार्यक्रम में नागरिक समाज संगठनों, सेंट मैरी स्कूल बेन्द्रमाई, सेंट विंसेंट स्कूल पुमदुंगलोंग और मिशनरी स्कूल बेन्द्रमाई के छात्रों और शिक्षकों के साथ-साथ सेनापति जिले के विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे बच्चों को सीधे कंपनी कमांडर से मिलने और उनकी दिनचर्या को जानने का अवसर मिला, जिससे उन्हें सेना की जिंदगी और उसके महत्व को समझने में मदद मिली।
यह ध्यान देने योग्य है कि असम राइफल्स लगातार ऐसी अनोखी पहलें करता रहता है, जिनका उद्देश्य आम लोगों को सेना के करीब लाना और दोनों के बीच भरोसा मजबूत करना है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को न केवल सेना के कामकाज के बारे में बताया जाता है, बल्कि यह भी सिखाया जाता है कि आपातकालीन स्थितियों में अपनी और दूसरों की मदद कैसे की जा सकती है।