क्या बाबा रामदेव ने स्वदेशी शिक्षा और चिकित्सा के माध्यम से भारत को श्रेष्ठ भारत बनाने का आह्वान किया?
सारांश
Key Takeaways
- स्वदेशी शिक्षा को अपनाने की आवश्यकता है।
- टैरिफ आतंकवाद की आलोचना की गई।
- भारत को शक्तिशाली राष्ट्र बनने की दिशा में एकजुट होना चाहिए।
- ब्रिटिश प्रतीकों का बहिष्कार करना चाहिए।
- धर्म के आधार पर विभाजन को समाप्त करना आवश्यक है।
हरिद्वार, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बाबा रामदेव ने सोमवार को कहा कि अमेरिका विभिन्न देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा है। वर्तमान में, दुनिया एक अत्यंत खतरनाक स्थिति का सामना कर रही है। ऐसे में हमें स्वदेशी शिक्षा और चिकित्सा के माध्यम से भारत को श्रेष्ठ भारत बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने टैरिफ की आलोचना करते हुए इसे टैरिफ आतंकवाद कहा।
बाबा रामदेव ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी से अपील की कि वे स्वदेशी का अनुसरण करें, ताकि हमारी अर्थव्यवस्था, अध्यात्म और अन्य क्षेत्रों में एक सशक्त भूमिका निभा सकें। यह सच है कि आज हमारा देश वैश्विक मंच पर सशक्त भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि हमें अब मैकाले की शिक्षा का बहिष्कार करना चाहिए। हमें ब्रिटिश शासन के प्रतीकों का बहिष्कार करना होगा, ताकि हमारा देश विकास की गति को तेज कर सके।
उन्होंने कहा कि जब हम 100 रुपए लेकर जाते हैं, तो हमें 1 डॉलर मिलता है, लेकिन मैं वह दिन देखना चाहता हूं जब हमारा 1 रुपया 100 डॉलर के बराबर हो। यह संभव है अगर हम 140 करोड़ भारतीय अखंड पुरुषार्थ करें।
बाबा रामदेव ने कहा कि यदि हमने खुद को शक्तिशाली नहीं बनाया, तो अन्य देश हमसे मुंह मोड़ लेंगे। कई देशों में भारत विरोधी ताकतें सक्रिय हो रही हैं। ऐसे में हमें एकजुट होकर दुश्मन देशों को उचित जवाब देना होगा।
उन्होंने कहा कि अगर हम धर्म के नाम पर विभाजित नहीं होते और एक ही पूर्वज की संतान के सिद्धांत के साथ काम करते हैं, तो हमारा देश अवश्य ही विश्व में एक शक्तिशाली राष्ट्र बनकर उभरेगा।