क्या मदर ऑफ ऑल डील्स पर सहमति केवल शुरुआत है: उर्सुला वॉन डेर लेयेन?

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क्या मदर ऑफ ऑल डील्स पर सहमति केवल शुरुआत है: उर्सुला वॉन डेर लेयेन?

सारांश

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की ऐतिहासिक उपलब्धि ने नए अवसरों की संभावनाएं खोली हैं। यह समझौता न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव लाएगा। जानें इस समझौते के महत्व और प्रभाव के बारे में।

Key Takeaways

  • मुक्त व्यापार समझौता से आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।
  • ईयू और भारत के बीच फ्री ट्रेड ज़ोन की स्थापना।
  • ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ी कटौती के साथ नए अवसर।
  • व्यापार और निवेश प्रवाह में वृद्धि की संभावना।
  • भारत के वैश्विक व्यापार विस्तार में महत्वपूर्ण कदम

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता को सफलतापूर्वक पूरा कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा, “आज यूरोप और भारत ने एक नया इतिहास रचा है। हमने सभी सौदों की जननी ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर सहमति बना ली है। इससे दो अरब लोगों का फ्री ट्रेड ज़ोन बनेगा और दोनों पक्षों को लाभ होगा। यह तो केवल शुरुआत है।”

इसके अतिरिक्त, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने महात्मा गांधी को सम्मान देते हुए लिखा, “शांति का मार्ग हथियारों की टकराहट से नहीं, बल्कि न्याय के आचरण से निकलता है, और यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है।”

सूचना मिली है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेंगे। इस अवसर पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की उपस्थिति में इस बहुप्रतीक्षित एफटीए की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ताएं समाप्त हो चुकी हैं और शिखर सम्मेलन में इसके निष्कर्ष की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उन्होंने समझौते को संतुलित और भविष्य-उन्मुख बताते हुए कहा कि इससे भारत-ईयू आर्थिक एकीकरण में मजबूती आएगी और व्यापार व निवेश प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

अधिकारियों के अनुसार, कानूनी जांच (लीगल स्क्रबिंग) के बाद लगभग छह महीनों में समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसके अगले वर्ष लागू होने की आशा है। यह शिखर सम्मेलन व्यापार, सुरक्षा व रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और लोगों के बीच संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने का एक अवसर प्रदान करेगा।

इस समझौते का एक बड़ा प्रभाव भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में देखने को मिलेगा। यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए भारतीय बाजार खोलते हुए आयात शुल्क में बड़ी कटौती की योजना है, जो वर्तमान 110 प्रतिशत से घटकर लगभग 40 प्रतिशत हो सकता है। इससे वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों की कारें भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अधिक सस्ती हो सकती हैं। फिलहाल भारत के 44 लाख यूनिट के वार्षिक कार बाजार में यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है।

भारत-ईयू एफटीए को भारत के वैश्विक व्यापार विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह समझौता अमेरिकी ऊंचे टैरिफ़ के प्रभाव को संतुलित करने में भी मदद कर सकता है और वस्त्र व आभूषण जैसे भारतीय निर्यातों के लिए यूरोपीय बाज़ार में नए अवसर खोलेगा।

Point of View

बल्कि इससे दोनों क्षेत्रों के बीच संबंधों में भी मजबूती आएगी। यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए नए दरवाजे खोलेगा और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है।
यह समझौता कब लागू होगा?
यह समझौता कानूनी जांच के बाद लगभग छह महीनों में लागू होने की उम्मीद है।
इस समझौते का ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर क्या प्रभाव होगा?
यह समझौता भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए आयात शुल्क में बड़ी कटौती करेगा।
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