क्या भारत-ईयू एफटीए ऐतिहासिक है? पीएम मोदी मास्टर रणनीतिकार हैं: शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे
सारांश
Key Takeaways
- भारत और ईयू के बीच ऐतिहासिक एफटीए पर सहमति हुई।
- प्रधानमंत्री मोदी की रणनीतिक सोच से समझौता संभव हुआ।
- ईयू के 96.6% निर्यात पर टैरिफ खत्म होगा।
- भारत के उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे।
- समझौता वैश्विक व्यापार के परिदृश्य में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर मंगलवार को सहमति बनी। लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस समझौते की जमकर प्रशंसा की।
यह समझौता लगभग दो दशकों की लंबी बातचीत के बाद आकार ले सका, जिसे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 'सभी डील्स की जननी' कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक बताया, जो वैश्विक जीडीपी के 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है।
श्रीकांत शिंदे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस समझौते की प्रशंसा करते हुए लिखा, "भारत के लिए यह कितना ऐतिहासिक पल है- 'सभी डील्स की जननी' यहां है! मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए धन्यवाद देता हूं।"
उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए बड़े अवसर खोलेगा, निर्यात बढ़ाएगा, रोजगार पैदा करेगा और भारत के वैश्विक आर्थिक नेतृत्व को मजबूत करेगा। श्रीकांत शिंदे ने इसे दो वैश्विक दिग्गजों की नई शुरुआत बताया। इस समय जब दुनिया व्यापार युद्ध और संरक्षणवाद का सामना कर रही है, भारत ने विकास को अपनाते हुए अपने हितों की रक्षा की है। पीएम मोदी को मास्टर रणनीतिकार बताते हुए उन्होंने कहा कि यह हालिया समझौतों के बाद आया है, जो भारत की दूरदर्शी व्यापार नीति को दर्शाता है।
समझौते के तहत भारत ईयू के 96.6 प्रतिशत निर्यात पर टैरिफ खत्म या कम करेगा, जबकि ईयू भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ घटाएगा। इससे ईयू के सामान जैसे कारों (110 से घटकर 10 प्रतिशत तक), मशीनरी, रसायन, दवाओं पर टैरिफ कम होंगे।
भारत के टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। समझौते से 2032 तक ईयू के भारत निर्यात को दोगुना करने की उम्मीद है। यह समझौता ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों के बीच भारत और ईयू के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।