क्या भारत विश्व का सबसे बड़ा और पारदर्शी लोकतंत्र है? - ज्ञानेश कुमार
सारांश
Key Takeaways
- भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा है।
- शुद्ध मतदाता सूची सशक्त लोकतंत्र की नींव है।
- भारत का चुनाव आयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित है।
- ईसीआईनेट का वैश्विक लॉन्च महत्वपूर्ण है।
- हम सभी को लोकतंत्र को संजोने का संकल्प लेना चाहिए।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत न केवल लोकतंत्र की जननी है, बल्कि यह विश्व का सबसे बड़ा और पारदर्शी लोकतंत्र भी है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि सभी लोकतांत्रिक राष्ट्र मानते हैं कि शुद्ध मतदाता सूची एक सशक्त लोकतंत्र की नींव है।
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने बताया कि विश्व के ३५ प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के समूह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (इंटरनेशनल आईडीईए) ने भारत को अध्यक्ष के रूप में स्वीकार किया है। यह सम्मान भारत की विश्वसनीय चुनावी प्रणाली पर लोकतांत्रिक समुदाय के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत चुनाव आयोग ने नई दिल्ली में लोकतंत्र और चुनावी प्रबंधन पर सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय महासंगम का आयोजन किया। लगभग ७० लोकतांत्रिक देशों ने इसमें भाग लिया, जिससे न केवल एक नया कीर्तिमान बना, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक विरासत और चुनावों की मजबूत, विस्तृत और पारदर्शी कार्यप्रणाली को सराहा गया। इस आयोजन के समापन पर सभी देशों ने 'दिल्ली घोषणा २०२६' को स्वीकार किया।
सीईसी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा स्थापित भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान—आईआईआईडीईएम, अब लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े प्रशिक्षण संस्थान के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए ईसीआईनेट के वैश्विक लॉन्च ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है और कई देशों ने ऐसी प्रणाली अपनाने में गहरी रुचि दिखाई है।
सीईसी ने कहा, "राष्ट्रीय मतदाता दिवस के इस पावन अवसर पर मैं भारत के प्रत्येक मतदाता को नमन करता हूं। आपकी भागीदारी से ही हमारा लोकतंत्र जीवंत है। आपका मतदान ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।"
अंत में उन्होंने कहा, "हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम लोकतंत्र को केवल अपनाएं नहीं, उसे जिएं, उसे संजोएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए और अधिक सशक्त बनाएं।"