क्या घरेलू टेक्सटाइल बाजार 13 लाख करोड़ तक पहुंचेगा? निर्यात में 25 फीसदी से ज्यादा उछाल: गिरिराज सिंह
सारांश
Key Takeaways
- भारत का कपड़ा उद्योग 16 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच चुका है।
- घरेलू टेक्सटाइल बाजार 2025 में 13 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच सकता है।
- निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- सरकार ने कई रुकावटें दूर की हैं।
- 40 नए देशों में निर्यात बढ़ाने की रणनीति सफल हो रही है।
नई दिल्ली, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पिछले दस वर्षों में भारत के कपड़ा उद्योग में अद्वितीय वृद्धि देखी गई है। सरकार के अनुसार, 2014 में यह क्षेत्र 8.4 लाख करोड़ रुपए का था, जो अब बढ़कर लगभग 16 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसके साथ ही, यह क्षेत्र देश में रोजगार सृजन का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश का घरेलू टेक्सटाइल बाजार भी तेजी से उन्नति कर रहा है। यह बाजार 6 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2025 में 13 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, कोरोना महामारी के बाद भारत के टेक्सटाइल निर्यात में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
मंत्री ने यह बातें राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल गारमेंट फेयर (आईआईजीएफ) के 74वें संस्करण में कही। उन्होंने बताया कि अब यह मेला केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वभर के गारमेंट खरीदारों के लिए एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है।
गिरिराज सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने टेक्सटाइल क्षेत्र में कई बाधाओं को दूर किया है, जिसमें गुणवत्ता नियंत्रण आदेश, रोडटेप एवं रोसिटल योजनाओं की राशि बढ़ाना, आयात शुल्क में अस्थायी कटौती और उलटी ड्यूटी संरचना को ठीक करने जैसे कदम शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार ने रोडटेप और रोसिटल योजनाओं के माध्यम से लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का समर्थन कपड़ा उद्योग को प्रदान किया है।
मंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उद्योग ने मजबूती और स्थिरता के साथ प्रगति की है। उन्होंने बताया कि 40 नए देशों में निर्यात बढ़ाने की रणनीति के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।
मंत्री के अनुसार, अर्जेंटीना में निर्यात 77 प्रतिशत, मिस्र में 30 प्रतिशत, पोलैंड और जापान में 20 प्रतिशत, जबकि स्वीडन और फ्रांस में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौता कुछ दिनों में हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है, जिससे टेक्सटाइल क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि भारत के पास युवा कार्यबल, पर्याप्त कच्चा माल और विदेशी मुद्रा भंडार है, इसलिए देश को अपने सभी लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब विदेशी मानकों पर निर्भर रहने के बजाय विजननेक्स्ट और इंडियासाइज जैसी स्वदेशी पहलों के माध्यम से अपने खुद के मानक विकसित कर रहा है।
इस अवसर पर एईपीसी के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने कहा कि देश के हर हिस्से से आए प्रदर्शकों की मौजूदगी भारत के मजबूत उत्पादन तंत्र को दर्शाती है। वहीं, विदेशी खरीदारों की भागीदारी से भारतीय उद्योग पर वैश्विक भरोसा स्पष्ट रूप से दिखता है।
उन्होंने बताया कि अप्रैल से दिसंबर 2025–26 के बीच भारत का रेडीमेड गारमेंट निर्यात 11,584.3 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 2.4 प्रतिशत अधिक है।