क्या जीडीपी ग्रोथ पर एनडीए खेमे में खुशी है, या विपक्ष के सवाल सही हैं?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.2 प्रतिशत है।
- एनडीए ने मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की।
- विपक्ष ने आंकड़ों की सत्यता पर सवाल उठाए।
- भविष्य में आर्थिक सुधार की जरूरत है।
- केंद्र और राज्य सरकारों का सहयोग आवश्यक है।
नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत की दूसरी तिमाही में जीडीपी दर 8.2 प्रतिशत रही। इस पर राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने भारत की तेज विकास दर का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व को दिया है, वहीं विपक्ष ने आंकड़ों की सटीकता पर सवाल उठाए हैं।
भाजपा विधायक इराशीष आचार्य ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि दूसरी तिमाही में भारत की 8.2 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ एक मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत है। उन्होंने जीएसटी सुधारों की तारीफ की और भरोसा जताया कि भारत 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था बनेगा।
जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इस ग्रोथ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की जीडीपी तेजी से बढ़ रही है। यह सिर्फ एक शुरुआत है। हमें मानव विकास सूचकांक को बेहतर बनाना है।"
सीपीएम प्रवक्ता चिगुरुपति बाबू राव ने इस ग्रोथ रेट को चैलेंज किया। उन्होंने कहा, "फाइनेंस मिनिस्टर के बयान सत्य नहीं हैं। जो आंकड़े दिखाए जा रहे हैं, वे असली स्थिति को नहीं दिखाते।"
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, "यदि जीडीपी बढ़ रही है, तो युवा बेरोजगार क्यों हैं? आज भी एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के बीच का अंतर स्पष्ट है।"