बिहार सरकार का मीट-मछली दुकानों पर बैन: मौलाना रशीदी की तीखी प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- बिहार सरकार का निर्णय धार्मिक स्थलों के पास मीट-मछली की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने का है।
- मौलाना रशीदी ने इस फैसले की आलोचना की है।
- फैसले से गरीबों की आजीविका पर संकट आ सकता है।
- सरकार को वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए।
- यह निर्णय बेरोजगारी की समस्या को और बढ़ा सकता है।
पटना, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार ने धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के पास मीट और मछली की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इस फैसले की अब अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने निंदा की है।
उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह सही है कि धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के आसपास मीट और मछली की दुकानें नहीं होनी चाहिए, लेकिन हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि संविधान में खाने के अधिकार का भी प्रावधान है। यह पहला बिंदु है। अगर हम दूसरे बिंदु की बात करें, तो बिहार जैसे राज्य में मछली और मीट की दुकानें आमतौर पर उन लोगों द्वारा चलाई जाती हैं जो निचले तबके से आते हैं।
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि इस फैसले के लागू होने के बाद उन लोगों की आजीविका पर संकट आ सकता है, जो मछली या मीट बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। यदि सरकार अपने इस निर्णय को वास्तव में लागू करना चाहती है, तो मेरा सुझाव है कि मीट और मछली की दुकानों से आजीविका चलाने वाले लोगों के लिए पहले कोई वैकल्पिक रोजगार विकसित किया जाए। इसके बाद ही इस फैसले को लागू किया जाना चाहिए, ताकि किसी को भी परेशानी न हो।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार इन लोगों के लिए एक नई मार्केट स्थापित करे, जिससे कोई भी यहां से मछली या मीट खरीदने में कठिनाई महसूस न करे। ऐसा करने से सरकार अपने निर्णय को सही तरीके से लागू करने में सफल होगी और इसके साथ ही लोगों की आजीविका पर भी संकट नहीं आएगा। क्योंकि इस काम में सबसे ज्यादा वही लोग जुड़े होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है।
मौलाना ने कहा कि मस्जिदों के आसपास मीट-मछली की दुकानों का होना किसी के लिए समस्या नहीं बनता है। हालांकि, मंदिरों के आसपास ऐसी दुकानों का अभाव होता है। अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार का यह आदेश गरीबों के भोजन पर प्रहार है। ऐसे आदेश नहीं आने चाहिए। जो व्यक्ति जिस तरीके से अपने जीवन यापन कर रहा है, उसे ऐसा करने दिया जाना चाहिए। देश में बेरोजगारी भी है। ऐसी स्थिति में यह निर्णय आने वाले दिनों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए कई प्रकार की चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है।