23 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार सरकार का मीट-मछली दुकानों पर बैन: मौलाना रशीदी की तीखी प्रतिक्रिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार सरकार का मीट-मछली दुकानों पर बैन: मौलाना रशीदी की तीखी प्रतिक्रिया

सारांश

बिहार सरकार ने शिक्षण संस्थानों और धार्मिक स्थलों के पास मीट और मछली की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है, जिस पर मौलाना साजिद रशीदी ने गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि इससे गरीबों की आजीविका प्रभावित होगी।

मुख्य बातें

बिहार सरकार का निर्णय धार्मिक स्थलों के पास मीट-मछली की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने का है।
मौलाना रशीदी ने इस फैसले की आलोचना की है।
फैसले से गरीबों की आजीविका पर संकट आ सकता है।
सरकार को वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए।
यह निर्णय बेरोजगारी की समस्या को और बढ़ा सकता है।

पटना, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार ने धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के पास मीट और मछली की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इस फैसले की अब अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने निंदा की है।

उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह सही है कि धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के आसपास मीट और मछली की दुकानें नहीं होनी चाहिए, लेकिन हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि संविधान में खाने के अधिकार का भी प्रावधान है। यह पहला बिंदु है। अगर हम दूसरे बिंदु की बात करें, तो बिहार जैसे राज्य में मछली और मीट की दुकानें आमतौर पर उन लोगों द्वारा चलाई जाती हैं जो निचले तबके से आते हैं।

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि इस फैसले के लागू होने के बाद उन लोगों की आजीविका पर संकट आ सकता है, जो मछली या मीट बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। यदि सरकार अपने इस निर्णय को वास्तव में लागू करना चाहती है, तो मेरा सुझाव है कि मीट और मछली की दुकानों से आजीविका चलाने वाले लोगों के लिए पहले कोई वैकल्पिक रोजगार विकसित किया जाए। इसके बाद ही इस फैसले को लागू किया जाना चाहिए, ताकि किसी को भी परेशानी न हो।

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार इन लोगों के लिए एक नई मार्केट स्थापित करे, जिससे कोई भी यहां से मछली या मीट खरीदने में कठिनाई महसूस न करे। ऐसा करने से सरकार अपने निर्णय को सही तरीके से लागू करने में सफल होगी और इसके साथ ही लोगों की आजीविका पर भी संकट नहीं आएगा। क्योंकि इस काम में सबसे ज्यादा वही लोग जुड़े होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है।

मौलाना ने कहा कि मस्जिदों के आसपास मीट-मछली की दुकानों का होना किसी के लिए समस्या नहीं बनता है। हालांकि, मंदिरों के आसपास ऐसी दुकानों का अभाव होता है। अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार का यह आदेश गरीबों के भोजन पर प्रहार है। ऐसे आदेश नहीं आने चाहिए। जो व्यक्ति जिस तरीके से अपने जीवन यापन कर रहा है, उसे ऐसा करने दिया जाना चाहिए। देश में बेरोजगारी भी है। ऐसी स्थिति में यह निर्णय आने वाले दिनों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए कई प्रकार की चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार सरकार ने मीट-मछली दुकानों पर क्यों पाबंदी लगाई है?
सरकार का मानना है कि शिक्षण संस्थानों और धार्मिक स्थलों के पास ऐसी दुकानों का होना उचित नहीं है।
मौलाना रशीदी ने इस फैसले की आलोचना क्यों की?
उन्होंने कहा कि इससे गरीबों की आजीविका पर संकट आएगा और यह उनके खाने के अधिकार का उल्लंघन है।
सरकार को इस फैसले को लागू करने से पहले क्या करना चाहिए?
सरकार को पहले उन लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार के साधन विकसित करने चाहिए जो मीट और मछली की दुकानों से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
क्या इस फैसले का गरीबों पर प्रभाव पड़ेगा?
जी हां, मौलाना रशीदी ने इस बात की चिंता व्यक्त की है कि इससे गरीबों की आजीविका प्रभावित होगी।
क्या इस निर्णय से बेरोजगारी बढ़ेगी?
हां, इस निर्णय से बेरोजगारी की समस्या और बढ़ सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो इस व्यवसाय से जुड़े हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले