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क्या बिहार में पिंक बसों की कमान अब महिलाओं के हाथों में होगी?

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क्या बिहार में पिंक बसों की कमान अब महिलाओं के हाथों में होगी?

सारांश

बिहार की पिंक बसों का संचालन अब पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में होगा। गणतंत्र दिवस पर महिला ड्राइवरों ने झांकी में भाग लिया। 6 महिला ड्राइवरों को पहले चरण में प्रशिक्षण दिया गया है, जो महादलित समुदाय से आती हैं। यह पहल महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए है।

मुख्य बातें

महिलाओं का सशक्तिकरण - पिंक बसों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जाएगा।
सुरक्षा - यह पहल महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
महादलित समुदाय - महिला ड्राइवर सभी महादलित समुदाय से आती हैं।
पहला पुरस्कार - परिवहन निगम को गणतंत्र दिवस पर पहला पुरस्कार मिला है।
सरकार का समर्थन - सरकार महिलाओं के सपनों को पूरा करने में उनके साथ खड़ी है।

पटना, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में पिंक बसों का संचालन अब पूरी तरह से महिलाओं द्वारा किया जाएगा। महिला ड्राइवर अब इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्होंने झांकी में भी भाग लिया। पहले चरण में 6 महिला ड्राइवरों को प्रशिक्षण दिया गया है, जो सभी महादलित समुदाय से हैं।

इसकी शुरुआत पटना के परिवहन कार्यालय से की गई है। पिछले साल मई में पिंक बस सेवा की शुरुआत की गई थी, जिसमें यह योजना बनाई गई थी कि ड्राइवर और कंडक्टर सभी महिलाएं होंगी।

बिहार परिवहन के मुख्य निदेशक अतुल कुमार वर्मा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा, "पिंक बसें महिलाओं के लिए हैं और महिलाओं द्वारा चलाई जा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह राज्य सरकार की एक अनोखी पहल है। इस बार महिलाओं को एचएमवी लाइसेंस दिया गया है और स्टीयरिंग व्हील उनके हाथों में है, जिससे उनकी पूरी भागीदारी सुनिश्चित होती है।"

उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सपनों को साकार करने में उनके साथ खड़ी है। महिलाओं को बस में सुरक्षित महसूस कराने के लिए इसकी शुरुआत की गई थी। आपको ज्ञात होगा कि परिवहन निगम को झांकी में पहला पुरस्कार प्राप्त हुआ है, जो हमारे लिए गर्व की बात है।

पिंक बस की ड्राइवर अनीता कुमारी ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं। आज हमारे लिए एक शानदार दिन है। हमने कभी नहीं सोचा था कि हम पिंक बस चलाएंगी। आज हमें यह अवसर मिला है। हम अपनी तरफ से मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती हैं।"

पिंक बस की ड्राइवर आरती कुमारी कहती हैं, "मैं भोजपुर जिले की निवासी हूं। मैं 2023 से नारी गुंजा से जुड़ी हुई हूं। मैंने औरंगाबाद में एलएमवी के लिए 21 दिन की ट्रेनिंग और एचएमवी के लिए एक महीने की ट्रेनिंग ली है। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगी।"

पिंक बस की ड्राइवर सरस्वती कुमारी ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि हम वह कर पा रहे हैं, जो पुरुष करते हैं। हम सरकार के रिजर्वेशन का लाभ उठा रहे हैं। हम चाहती हैं कि रिजर्वेशन जारी रहे ताकि और लड़कियां प्रेरित हो सकें और अपने सपने पूरे कर सकें।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करती है, बल्कि उनकी सुरक्षा और सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देती है। महिलाओं के लिए यह मौका उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होगा और समाज में उनके प्रति दृष्टिकोण को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिंक बसों का संचालन कौन करेगा?
पिंक बसों का संचालन अब पूरी तरह से महिलाओं द्वारा किया जाएगा।
महिला ड्राइवरों को कितनी ट्रेनिंग दी गई है?
पहले चरण में 6 महिला ड्राइवरों को ट्रेनिंग दी गई है।
पिंक बसों की शुरुआत कब हुई थी?
पिंक बस सेवा की शुरुआत पिछले साल मई में हुई थी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है।
महिला ड्राइवरों को किस प्रकार का लाइसेंस दिया गया है?
महिला ड्राइवरों को एचएमवी लाइसेंस दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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