क्या भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात कर लोकपाल की नियुक्ति का विरोध किया?

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क्या भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात कर लोकपाल की नियुक्ति का विरोध किया?

सारांश

भारतीय जनता पार्टी ने केरल में लोकपाल की नियुक्ति का विरोध करते हुए राज्यपाल से मुलाकात की। भाजपा ने इसे कानूनी दृष्टि से गलत बताते हुए एक पत्र सौंपा है। इस मामले में भाजपा ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया है जो नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठाते हैं।

Key Takeaways

  • भाजपा ने लोकपाल की नियुक्ति का विरोध किया है।
  • राज्यपाल से मुलाकात में कानूनी तर्क प्रस्तुत किए गए।
  • केरल लोकायुक्त अधिनियम-1999 का हवाला दिया गया।
  • संस्थानिक औचित्य का ध्यान रखना आवश्यक है।

तिरुवनंतपुरम, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी ने केरल में लोकपाल की नियुक्ति का विरोध किया है। भाजपा ने इसे कानूनी आधार पर गलत बताते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को एक पत्र सौंपा है।

भाजपा की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और महासचिव एडवोकेट एस. सुरेश ने शनिवार को लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने स्थानीय स्वशासन निकायों के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) बाबू मैथ्यू पी. जोसेफ को लोकपाल नियुक्त करने के कैबिनेट के निर्णय का विरोध करते हुए एक अर्जी सौंपी।

भाजपा नेताओं ने केरल लोकायुक्त अधिनियम-1999 की धारा 5(3) का हवाला दिया, जो किसी पूर्व लोकायुक्त या उप लोकायुक्त को सरकार या किसी प्राधिकरण, निगम, कंपनी, सोसायटी या विश्वविद्यालय के तहत लाभ का कोई भी पद संभालने से रोकती है।

भाजपा नेताओं ने तर्क दिया कि लोकपाल सरकारी फंड से वेतन वाला एक वैधानिक पद है। पत्र में कहा गया है कि केरल लोकायुक्त अधिनियम-1999 की धारा 5(3) के तहत रोक स्पष्ट है और इसमें मनमानी व्याख्या की कोई गुंजाइश नहीं है।

भाजपा ने चेतावनी दी कि इस प्रावधान का उल्लंघन करके की गई कोई भी नियुक्ति कानूनी रूप से अमान्य होगी और न्यायिक जांच के दायरे में आएगी। पार्टी ने संस्थागत औचित्य के बारे में भी चिंता जताई और कहा कि ऐसी नियुक्तियों की अनुमति देने से वैधानिक निगरानी निकायों की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है।

भाजपा के अनुसार, जमीनी स्तर पर शासन की देखरेख करने वाली संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पात्रता मानदंडों का सख्ती से पालन करना जरूरी है। राज्यपाल से अपने संवैधानिक विवेक का इस्तेमाल करने का आग्रह करते हुए भाजपा नेताओं ने अनुरोध किया कि कैबिनेट के निर्णय को कानूनी आधार पर पुनर्विचार के लिए वापस भेजा जाए।

केरल लोक भवन (राज्यपाल कार्यालय) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर और एडवोकेट एस. सुरेश ने लोकभवन में राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने केरल लोकायुक्त एक्ट-1999 के तहत कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए जस्टिस (रिटायर्ड) बाबू मैथ्यू पी. जोसेफ को लोकपाल नियुक्त करने के कैबिनेट के निर्णय का विरोध करते हुए एक याचिका सौंपी।"

Point of View

बल्कि पूरे देश में वैधानिक निकायों की स्वतंत्रता और जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।
NationPress
05/02/2026

Frequently Asked Questions

भाजपा ने लोकपाल की नियुक्ति का विरोध क्यों किया?
भाजपा ने इसे कानूनी दृष्टि से गलत मानते हुए राज्यपाल को पत्र सौंपा है।
राजीव चंद्रशेखर कौन हैं?
राजीव चंद्रशेखर भाजपा के केरल इकाई के अध्यक्ष हैं।
क्या लोकपाल की नियुक्ति कानूनी है?
भाजपा का कहना है कि यह केरल लोकायुक्त अधिनियम-1999 के तहत अवैध है।
सरकार ने किसे लोकपाल नियुक्त किया है?
सरकार ने जस्टिस (रिटायर्ड) बाबू मैथ्यू पी. जोसेफ को लोकपाल नियुक्त किया है।
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