क्या चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन का फैसला सही है?

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क्या चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन का फैसला सही है?

सारांश

चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने के निर्णय ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। टीएमसी नेता मजीद मेमन ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। क्या यह बैन सही है? जानें इस मुद्दे पर विस्तार से।

Key Takeaways

  • बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाया है।
  • टीएमसी नेता मजीद मेमन ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
  • यह निर्णय अदालत में चुनौती का सामना कर सकता है।
  • चार धाम में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री शामिल हैं।
  • यह मुद्दा धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने का अवसर है।

मुंबई, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने के निर्णय के बाद से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता मजीद मेमन ने राज्य सरकार और मंदिर समिति के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

मजीद मेमन ने मंगलवार को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यदि राज्य सरकार या उससे संबंधित कोई संस्था ऐसा फैसला लेती है जो नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है, तो वह लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और इस तरह की पाबंदियां संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

टीएमसी नेता ने आगे कहा कि जब इस तरह के प्रतिबंध लगते हैं, तो उनके साथ कुछ कानूनी आधार और शर्तें होनी चाहिए। केवल धार्मिक पहचान के आधार पर किसी वर्ग को धार्मिक स्थल पर जाने से रोकना कानूनी दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि गैर-हिंदुओं के चार धाम यात्रा या मंदिर प्रवेश पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगाने के निर्णय को अदालत में चुनौती दी जाती है, तो उनके आकलन के अनुसार अदालत इस निर्णय को पलट सकती है।

गौरतलब है कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीएस) के हालिया निर्णय के अनुसार, सदियों पुराने मंदिरों में केवल हिंदुओं का प्रवेश होगा। यह प्रस्तावित प्रतिबंध समिति द्वारा संचालित सभी मंदिरों पर लागू होगा, जिसमें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भी शामिल हैं। बीकेटीएस के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस संदर्भ में बताया कि समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी।

चार धाम में केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों के अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री भी शामिल हैं। इन दोनों तीर्थ स्थलों के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के त्योहार के साथ फिर से खुलेंगे। यह घोषणा उत्तराखंड में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर चल रही एक बड़ी बहस के बीच आई है। इस महीने की शुरुआत में हरिद्वार के हर की पौड़ी को 'गैर-हिंदुओं के लिए वर्जित' घोषित करने वाले पोस्टर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर दिखाई दिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया। इन पोस्टरों में हर की पौड़ी क्षेत्र को पूरी तरह से 'हिंदू क्षेत्र' बताया गया था, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक पहुंच को लेकर बहस और तेज हो गई।

Point of View

यह स्पष्ट है कि धार्मिक स्थलों में प्रवेश के नियमों पर चर्चा आवश्यक है। संविधान की गरिमा को बनाए रखते हुए, सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। यह बहस समाज में धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने का अवसर भी है।
NationPress
05/02/2026

Frequently Asked Questions

क्या चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है?
हाँ, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाया है।
टीएमसी नेता मजीद मेमन ने इस बैन पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
मजीद मेमन ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है और इसे अदालत में चुनौती देने की संभावना जताई है।
क्या इस निर्णय को अदालत में चुनौती दी जा सकती है?
हाँ, यदि गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी जाती है, तो अदालत इसे पलट सकती है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष कौन हैं?
बीकेटीएस के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी हैं।
चार धाम में कौन-कौन से मंदिर शामिल हैं?
चार धाम में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री शामिल हैं।
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