क्या एक फिल्म ने चतुर रामलिंगम का करियर बदल दिया?
सारांश
Key Takeaways
- लीड रोल का महत्व
- किस्मत और मेहनत का मेल
- भाषा की बाधाएँ
- अभिनय की कला
- सपनों का पीछा करना
मुंबई, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा में नाम तभी कमाया जा सकता है, जब किसी फिल्म में लीड रोल करने का अवसर मिले, क्योंकि लीड रोल ही किसी अभिनेता की पहचान होता है।
हालांकि, चतुर रामलिंगम के साथ ऐसा नहीं था। उन्होंने तीन बड़े स्टार्स को पीछे छोड़ते हुए अपनी दूसरी फिल्म से अपार सफलता प्राप्त की। हम बात कर रहे हैं 'थ्री इडियट्स' के ओमी वैद्य की, जिन्होंने चतुर रामलिंगम उर्फ साइलेंसर का किरदार निभाया था।
ओमी वैद्य का जन्म 10 जनवरी को लॉस एंजेलिस में हुआ था, और उनकी परवरिश वहीं हुई। वे समय-समय पर भारत आते रहते थे। उनके पिता और भाई डॉक्टर थे और वे चाहते थे कि ओमी भी डॉक्टर बने, परंतु ओमी की आंखों में एक्टिंग का सपना था और उन्होंने अपने अभिनय को निखारने के लिए अमेरिका में थिएटर ज्वाइन किया। भारत आने पर, वे हमेशा मराठी थिएटर में कुछ दिन बिताते थे।
ओमी हमेशा हॉलीवुड में अपनी किस्मत आजमाना चाहते थे और उन्हें छोटे-मोटे रोल मिलने लगे, लेकिन उनकी किस्मत ने कुछ और ही सोचा था। ओमी को पता नहीं था कि एक मेगा फिल्म उनकी किस्मत को बदलने वाली है। शादी में आए ओमी ने अपने दोस्त के कहने पर फिल्म 'थ्री इडियट्स' के लिए ऑडिशन दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले अभिनेता को राजू रस्तोगी का रोल ऑफर किया गया था? उनकी टूटी-फूटी हिंदी ने सब कुछ बिगाड़ दिया।
ऑडिशन के दिन उन्हें राजू रस्तोगी की लाइनें पढ़ने के लिए कहा गया था, परंतु उनके लिए शुद्ध हिंदी बोल पाना मुश्किल हो रहा था। उन्हें लगने लगा कि उनका पत्ता साफ है, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें फिल्म के डायरेक्टर राजू हिरानी ने दोबारा बुलाया और 'लगे रहो मुन्ना भाई' की स्क्रिप्ट पढ़ने को दी।
अभिनेता ने इंटरव्यू में खुलासा किया कि संजय दत्त की लाइन इंसाफ और देश पर थी, लेकिन उन्होंने सब कुछ गलत पढ़ा और वहां बैठे सभी लोग हंसने लगे। राजू ने उनकी हिंदी की वजह से ही उन्हें रोल ऑफर किया था, क्योंकि उन्हें ऐसे शख्स की तलाश थी, जिसे हिंदी बोलनी नहीं आती हो, लेकिन एक्टिंग आती हो।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें बार-बार निर्देश दिए गए कि वे हिंदी न सीखें और फिल्म की स्क्रिप्ट भी शूटिंग शुरू होने से तीन दिन पहले मिली थी।