क्या नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा करना चुनाव आयोग का काम है?: जगन्नाथ सरकार
सारांश
Key Takeaways
- चुनाव आयोग का कार्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
- एसआईआर प्रक्रिया से वोटर लिस्ट को शुद्ध किया जा रहा है।
- बिहार में भी एसआईआर को लेकर विपक्ष ने गुमराह करने का प्रयास किया।
- आगामी विधानसभा चुनाव में टीएमसी की स्थिति पर प्रश्न उठाए गए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।
नादिया, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में एसआईआर से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर भाजपा नेता जगन्नाथ सरकार ने कहा कि सच को सुनिश्चित करना और यहां के नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा करना चुनाव आयोग का कर्तव्य है।
नादिया में भाजपा नेता जगन्नाथ सरकार ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि चुनाव आयोग एसआईआर के माध्यम से वोटर लिस्ट को शुद्ध करने का कार्य कर रही है, और यह उनका कर्तव्य है। जो लोग मृत हैं या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो गए हैं, उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग को दिए गए निर्देश भी सही हैं।
जगन्नाथ सरकार ने बिहार में हुए एसआईआर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी विपक्ष ने एसआईआर के संबंध में जनता को गुमराह करने का प्रयास किया। यह दावा किया गया कि जीवित व्यक्तियों के वोट काटे गए, लेकिन सच्चाई सभी जानते हैं। आयोग के पास एक वोटर नहीं पहुंचा कि उसका वोट काटा गया। विधानसभा चुनाव शुद्ध वोटर लिस्ट के आधार पर हुए और एनडीए ने भारी बहुमत से जीत हासिल की। यही स्थिति बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की होने वाली है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के बयान पर उन्होंने कहा कि अब तक घुसपैठियों के वोट से जीतने वाली टीएमसी का खेल आगामी विधानसभा चुनाव में समाप्त होने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी की ओर से बांग्लादेशी मुस्लिमों को नागरिक बताकर वोटर लिस्ट में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ‘सुप्रीम थप्पड़’ पड़ गया है, और यह बहुत चुभ रहा है। जो लोग बंगाल को नीचा दिखाने आए थे, उनका चेहरा अब शर्म से लाल हो गया है। जिन लोगों ने 10 करोड़ लोगों को डराने की कोशिश की थी, आज वे खुद डर के मारे कांप रहे हैं। जिन लोगों ने हमारे मतदान के संवैधानिक अधिकार पर सवाल उठाने की हिम्मत की, अब उन्हीं से उनके क्रूर और अमानवीय तरीकों के लिए पूछताछ की जा रही है।