कर्नल श्रीकांत पुरोहित को भारतीय सेना द्वारा ब्रिगेडियर रैंक में पदोन्नति की मंजूरी
सारांश
Key Takeaways
- कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नति मिली।
- यह निर्णय 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले से संबंधित कानूनी कार्यवाही के बीच आया।
- सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) ने उनकी सेवानिवृत्ति पर रोक लगाई थी।
- कर्नल पुरोहित को 2017 में जमानत पर रिहा किया गया था।
- सेना ने प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के अनुसार पदोन्नति की मंजूरी दी।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नति देने के लिए मंजूरी प्रदान की है। यह निर्णय उनके करियर की प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, खासकर 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में चल रही कानूनी कार्यवाही के संदर्भ में।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह फैसला सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के पूर्व निर्देशों के आधार पर लिया गया है। एएफटी ने उनकी सेवानिवृत्ति पर रोक लगाते हुए उनकी पदोन्नति की याचिका की सुनवाई की थी।
न्यायाधिकरण के हस्तक्षेप से यह सुनिश्चित हुआ कि उनकी पदोन्नति और सेवा लाभों से संबंधित वैधानिक शिकायत पर निर्णय आने तक उनकी सेवा अवधि सक्रिय बनी रहे।
एएफटी ने कर्नल पुरोहित की याचिका पर ध्यान दिया, जिसमें उन्होंने कर्नल से ब्रिगेडियर की पदोन्नति की मांग की थी। उनका तर्क था कि मालेगांव विस्फोट मामले में गिरफ्तारी और उसके बाद की लंबी कानूनी कार्यवाही ने उनके करियर की प्रगति को प्रभावित किया है।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि कर्नल पुरोहित को 2008 में गिरफ्तार किया गया था और वे 2017 तक हिरासत में रहे, जब उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना में अपनी सेवा पुनः शुरू की। जुलाई 2025 में, मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने उन्हें मालेगांव विस्फोट मामले में बरी कर दिया।
इससे पहले, ट्रिब्यूनल ने भारत सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था, जिसमें पूछा गया था कि अधिकारी द्वारा मांगी गई राहत क्यों नहीं दी जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कहा कि लंबे और बेदाग सेवा रिकॉर्ड के बावजूद, मामले से संबंधित परिस्थितियों के कारण उनकी पदोन्नति पर विचार नहीं किया गया।
एएफटी के निष्कर्षों में यह भी कहा गया कि उनकी वैधानिक शिकायत पर अंतिम निर्णय आने तक उनकी सेवानिवृत्ति को स्थगित रखा जाना चाहिए। न्यायाधिकरण ने उनके बरी होने और पुनः कार्यभार ग्रहण करने के बाद के सेवा रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया।
आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि हुई है कि इन कार्यवाहियों के बाद सेना ने प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के अंतर्गत उन्हें ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नति देने की मंजूरी दी है।