क्या कांग्रेस को मुस्लिम वोट की जरूरत है, लेकिन हाईकमान के पास नेता नहीं ? - शकील अहमद
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस को मुस्लिम वोटर का समर्थन आवश्यक है।
- शकील अहमद ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
- भाजपा के खिलाफ कांग्रेस की स्थिति कमजोर है।
- बिहार चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा है।
- राहुल गांधी को पार्टी के नेतृत्व पर पुनर्विचार करना होगा।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को लगातार चुनावों में असफलताओं का सामना करना पड़ रहा है। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद शकील अहमद ने पार्टी को अलविदा कह दिया। अहमद ने रविवार को राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में मुस्लिम समाज के वोट और राहुल गांधी के दृष्टिकोण पर चर्चा की।
शकील अहमद ने कहा, "कई वर्षों से स्थिति यह है कि मुसलमान कांग्रेस को वोट देते रहे हैं। कांग्रेस भी चाहती है कि उसे मुस्लिम वोट मिले। दूसरी ओर, भाजपा भी मुस्लिम वोट चाहती है, पर वे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भाषण देती हैं। यदि कोई पार्टी किसी के समर्थन में बोलती है, तो लोगों को यह लगता है कि यह वोट के लिए किया जा रहा है। यदि किसी के खिलाफ कुछ कहा जाए, तो वह यह नहीं समझेगा कि इसे बेवकूफ बनाने के लिए कहा गया है; वह सच में यह समझेगा कि पार्टी उसकी दुश्मन है।"
अहमद ने आगे कहा, "राहुल गांधी के मन में यह धारणा है कि जिस दिन मुसलमान पीएम मोदी या भाजपा से नाखुश होंगे, कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर होगी, जिससे उसे उनका समर्थन मिलेगा। लेकिन हम दूसरे नंबर से नीचे नहीं जा सकते, क्योंकि कई क्षेत्रीय नेता एक ही राज्य तक सीमित हैं। एक से ज्यादा राज्यों में सिर्फ भाजपा और कांग्रेस हैं।"
उन्होंने बिहार चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर कहा, "मुझे नहीं लगता कि परिणाम में खास बदलाव होगा। बिहार में कांग्रेस कई गुटों में बंटी हुई है। हमारे गठबंधन में केवल दो समुदाय बचे हैं: एक यादव समाज और दूसरा मुस्लिम समाज। बाकी लगभग एक तरफ हैं। ऐसे में, यह कहना मुश्किल है कि इसके परिणामों पर क्या असर होगा।"
अहमद ने कहा, "राहुल गांधी चुनाव से पहले संविधान की एक प्रति लेकर प्रचार करते थे कि उन्हें भाजपा और आरएसएस से इसे बचाना है। लेकिन क्या वे भाजपा-आरएसएस के खिलाफ लड़ने के लिए भाजपा से लोगों को टिकट देंगे? पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस की जीरो सीट आ रही है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है?"