क्या सीपीआईएम ने बेबी अरिहा शाह मामले में विदेश मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की?

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क्या सीपीआईएम ने बेबी अरिहा शाह मामले में विदेश मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की?

सारांश

जर्मनी में फोस्टर केयर में रह रही भारतीय बच्ची बेबी अरिहा शाह के मामले में सीपीआईएम सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के दौरान उठाने का अवसर हो सकता है।

Key Takeaways

  • जर्मनी में रह रही भारतीय बच्ची बेबी अरिहा शाह को वापस लाने की मांग।
  • सीपीआईएम सांसद ने विदेश मंत्री से हस्तक्षेप की अपील की।
  • अरिहा के माता-पिता के खिलाफ सभी आरोप समाप्त हो चुके हैं।
  • जर्मन प्रशासन ने दुरुपयोग के सबूतों से इनकार किया है।
  • अरिहा की भावनात्मक स्थिति नाजुक है।

नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जर्मनी के फोस्टर केयर में रह रही भारतीय बच्ची बेबी अरिहा शाह को भारत वापस लाने का मुद्दा एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गया है। सीपीआईएम के सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने बुधवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को पत्र लिखकर तत्काल उच्चस्तरीय कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने पत्र में कहा कि जर्मन चांसलर की प्रस्तावित भारत यात्रा को इस संवेदनशील मुद्दे के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए।

अरिहा शाह, जो एक भारतीय नागरिक और भारतीय पासपोर्ट धारक है, पिछले साढ़े चार वर्षों से जर्मनी में चाइल्ड सर्विसेज की हिरासत में है। यह स्थिति तब है जब उसके माता-पिता पर लगाए गए सभी आपराधिक आरोप समाप्त हो चुके हैं।

पत्र में बताया गया है कि संबंधित जर्मन अस्पताल ने किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के सबूत होने से इनकार किया है। इतना ही नहीं, अदालत द्वारा नियुक्त मनोवैज्ञानिक ने भी माता-पिता को बच्ची की कस्टडी लौटाने की सिफारिश की है। इसके बावजूद जर्मन प्रशासन माता-पिता के अधिकार समाप्त करने और बच्ची को जर्मनी में गोद देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

डॉ. ब्रिटास ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अरिहा के पारिवारिक जीवन, संस्कृति, भाषा और धर्म से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, जो कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार संधि के तहत संरक्षित हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं कि अरिहा को भारत में अपने विस्तारित परिवार से संपर्क नहीं करने दिया जा रहा है और न ही उसे भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में भाग लेने का अवसर मिल रहा है।

बच्ची की भावनात्मक स्थिति को बेहद नाजुक बताते हुए उन्होंने कहा कि अरिहा को अब तक पांच बार अलग-अलग फोस्टर घरों में रखा गया है, जिससे उसे स्थिर देखभाल और भावनात्मक सुरक्षा नहीं मिल पाई। फिलहाल, उसके माता-पिता से महीने में दो बार मिलने की अनुमति ही उसका एकमात्र सहारा है, लेकिन जर्मनी में माता-पिता के वीजा की सीमाओं के कारण यह व्यवस्था भी खतरे में है।

डॉ. ब्रिटास ने बताया कि यह मामला कई अन्य सांसदों द्वारा भी उठाया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि देशभर में इसे लेकर मानवीय चिंता गहरी है। उन्होंने कहा कि 12-13 जनवरी को जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पहली आधिकारिक भारत यात्रा इस मुद्दे को सर्वोच्च राजनीतिक स्तर पर सुलझाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है और सरकार को इसे प्राथमिकता से उठाना चाहिए, ताकि बच्ची के सर्वोत्तम हित में मानवीय और कानूनी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

Point of View

चाहे वे किसी भी देश में हों। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
NationPress
08/01/2026

Frequently Asked Questions

बेबी अरिहा शाह कौन है?
बेबी अरिहा शाह एक भारतीय बच्ची है, जो पिछले साढ़े चार वर्षों से जर्मनी के फोस्टर केयर में रह रही है।
सीपीआईएम सांसद ने किससे हस्तक्षेप की मांग की है?
सीपीआईएम सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से हस्तक्षेप की मांग की है।
अरिहा शाह के माता-पिता की स्थिति क्या है?
अरिहा के माता-पिता पर लगाए गए सभी आपराधिक आरोप समाप्त हो चुके हैं।
क्या जर्मन प्रशासन ने अरिहा को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की है?
हाँ, जर्मन प्रशासन माता-पिता के अधिकार समाप्त करने और बच्ची को गोद देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
अरिहा की भावनात्मक स्थिति कैसी है?
अरिहा की भावनात्मक स्थिति नाजुक है, और उसे स्थिर देखभाल और भावनात्मक सुरक्षा नहीं मिल रही है।
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