डार्क एनर्जी: ब्रह्मांड का रहस्य जो तेजी से फैलाने वाली ऊर्जा है
सारांश
Key Takeaways
- डार्क एनर्जी ब्रह्मांड का लगभग ६८ से ७० प्रतिशत हिस्सा है।
- यह एक अदृश्य शक्ति है जो ब्रह्मांड के विस्तार को तेज करती है।
- 1990 के दशक में टाइप सुपरनोवा के अध्ययन ने डार्क एनर्जी का पता लगाया।
- यह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत कार्य करती है।
- नासा के हबल और जेम्स वेब टेलीस्कोप इसके रहस्यों को सुलझाने में लगे हैं।
नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अंतरिक्ष रहस्यों से भरा हुआ है। वैश्विक वैज्ञानिक इस रहस्य को सुलझाने में जुटे हुए हैं। कई रहस्यों का समाधान हो चुका है, जबकि कुछ आज भी अनसुलझे हैं। 'डार्क एनर्जी' भी एक ऐसा ही रहस्य है, जिसे वैज्ञानिक ब्रह्मांड को तेजी से फैलाने वाली एक रहस्यमय शक्ति मानते हैं।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, डार्क एनर्जी ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य है। यह एक अदृश्य शक्ति है जो पूरे ब्रह्मांड को तेजी से फैला रही है। लगभग ६८ से ७० प्रतिशत ब्रह्मांड इसी डार्क एनर्जी से बना हुआ है। यह संकेत देती है कि ब्रह्मांड केवल फैल नहीं रहा, बल्कि इसकी गति निरंतर बढ़ती जा रही है।
नासा के अनुसार, लगभग १३.८ अरब वर्ष पहले बिग बैंग हुआ। ब्रह्मांड एक छोटे, अत्यधिक गर्म और घने बिंदु से शुरू हुआ और तेजी से फैलने लगा। जैसे गुब्बारा फूलता है, वैसे ही ब्रह्मांड का विस्तार हुआ। ठंडा होते ही एटम और मॉलिक्यूल बने, और फिर तारे, गैलेक्सियां और ग्रह विकसित हुए। आज भी ब्रह्मांड का विस्तार जारी है। पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि ब्रह्मांड में मौजूद मैटर की गुरुत्वाकर्षण शक्ति इसे धीमा कर देगी।
हालांकि, १९९० के दशक के अंत में दो अलग-अलग टीमों ने टाइप सुपरनोवा (एक विशेष प्रकार के तारे के विस्फोट) का अध्ययन किया। ये सुपरनोवा हमेशा एक समान चमक देते हैं, इसलिए इन्हें दूर की गैलेक्सी की दूरी नापने का “स्टैंडर्ड कैंडल” माना गया। केवल हबल टेलीस्कोप के पास इन सुपरनोवा का दूर की गैलेक्सियों में पता लगाने की क्षमता थी। अध्ययन में पाया गया कि सुपरनोवा अपेक्षा से कम धुंधले दिखाई दे रहे थे, जो यह दर्शाता है कि उनकी मेज़बान गैलेक्सी उम्मीद से अधिक दूर थी। यह केवल तब समझ में आता है जब ब्रह्मांड का विस्तार तेज़ी से हो रहा हो, और इसके पीछे की वजह अभी तक अज्ञात है। इस तेज़ विस्तार के लिए जिम्मेदार अज्ञात शक्ति को ही डार्क एनर्जी का नाम दिया गया।
डार्क एनर्जी कैसे कार्य करती है? यह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत काम करती है। यह ब्रह्मांड में एक धकेलने वाली ताकत के रूप में कार्य करती है। बिग बैंग के प्रारंभिक चरण में गुरुत्वाकर्षण प्रभावी था और विस्तार धीमा हुआ। लेकिन जैसे-जैसे ब्रह्मांड बड़ा हुआ, गैलेक्सियां एक-दूसरे से दूर हो गईं और गुरुत्वाकर्षण कमज़ोर हो गया। तब डार्क एनर्जी का प्रभाव बढ़ा और विस्तार तेज़ हो गया।
ब्रह्मांड में डार्क एनर्जी क्या है—यह कोई क्षेत्र है, स्थिरांक है, या कुछ और, यह अभी भी अज्ञात है। हबल और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप इस रहस्य को सुलझाने में जुटे हैं।