31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या सीबीआई डिजिटल अरेस्ट से जुड़े नेटवर्क की जांच करेगी? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या सीबीआई डिजिटल अरेस्ट से जुड़े नेटवर्क की जांच करेगी? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल

सारांश

डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। केंद्र सरकार ने सीबीआई को जांच सौंपने और उसकी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी है। क्या यह कदम समस्या का समाधान कर सकेगा? जानिए इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट में।

मुख्य बातें

डिजिटल अरेस्ट के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।
केंद्र सरकार ने सीबीआई को जांच के लिए अधिकृत किया है।
हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया गया है।
समिति की पहली बैठक में महत्वपूर्ण सुझावों पर चर्चा हुई।
केंद्र ने एक ठोस योजना के लिए समय मांगा है।

नई दिल्ली, १३ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। डिजिटल अरेस्ट से संबंधित मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान मामले में केंद्र सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में निर्धारित है।

केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जांच प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है और इसके लिए एक ठोस, समन्वित योजना पर कार्य चल रहा है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अदालत के १६ दिसंबर २०२५ के आदेश के अनुसार दिल्ली पुलिस की एफआईआर अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है। इसके पश्चात, सीबीआई ने ९ जनवरी को इस मामले में नई एफआईआर दर्ज की है। इसका उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट से जुड़े नेटवर्क और अपराध के पूरे ढांचे की गहन जांच करना है।

स्टेटस रिपोर्ट में यह भी उल्लेखित किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट की समस्या से निपटने के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया है। इस समिति का नेतृत्व गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा के विशेष सचिव कर रहे हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, कानून मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, आरबीआई, सीबीआई, एनआईए, दिल्ली पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। आई4सी के सीईओ इस समिति के मेंबर सेक्रेटरी हैं। अटॉर्नी जनरल भी नियमित रूप से इस समिति की बैठकों में भाग ले रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति की पहली बैठक २९ दिसंबर को हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और एमिकस क्यूरी के सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके पश्चात २ जनवरी को एमिकस क्यूरी के साथ एक विशेष बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें दूरसंचार विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, आरबीआई और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के प्रतिनिधि शामिल थे। इसी प्रकार, ६ जनवरी को आईटी इंटरमीडियरीज जैसे गूगल, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और माइक्रोसॉफ्ट के साथ भी बैठक की गई।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया है कि सभी विभागों से सुझाव लेकर एक ठोस और व्यापक योजना तैयार करने के लिए उसे कम से कम एक महीने का समय दिया जाए, ताकि डिजिटल अरेस्ट जैसी गंभीर समस्या का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकार की कार्रवाई डिजिटल अपराधों को नियंत्रित करने के लिए एक सकारात्मक कदम है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, इसे प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों का समन्वय आवश्यक है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट एक प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति को उसके डिजिटल गतिविधियों के आधार पर गिरफ्तार किया जाता है।
सीबीआई इस मामले में क्या भूमिका निभाएगी?
सीबीआई डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की जांच करेगी और अपराध के नेटवर्क की गहराई से जांच करेगी।
क्या सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट महत्वपूर्ण है?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है और सरकार की कार्रवाई को उचित ठहराती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले