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डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले प्रमुख नेता

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डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले प्रमुख नेता

सारांश

नई दिल्ली में प्रमुख नेताओं ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। आइए जानते हैं उनके संघर्ष और आदर्शों के बारे में।

मुख्य बातें

बाबासाहेब अंबेडकर का जीवन संघर्ष और प्रेरणा का प्रतीक है।
उनके सिद्धांत आज भी सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण हैं।
समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए शिक्षा और जागरूकता आवश्यक हैं।
समानता, स्वतंत्रता और न्याय के मूल्यों को अपनाना चाहिए।
बाबासाहेब के विचार हमें एक न्यायपूर्ण समाज की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, और महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने भारतीय संविधान के निर्माता और भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन एक बड़े संघर्ष की प्रेरक कहानी है। कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने उच्चतम शिखरों को छुआ और अपने अदम्य साहस, कठोर मेहनत और शिक्षा के माध्यम से न केवल स्वयं को स्थापित किया, बल्कि करोड़ों वंचितों और शोषितों के लिए आशा की नई किरण बन गए।"

उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता के मूल्यों को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया और इन्हीं सिद्धांतों को भारतीय संविधान में शामिल कर राष्ट्र को एक मजबूत दिशा दी। बाबासाहेब हमारे राष्ट्र के अनमोल रत्न हैं, जिनके जीवन और कार्यों ने स्वतंत्रता पूर्व और पश्चात की पीढ़ियों को प्रभावित किया और प्रेरणा के स्रोत बने।

उन्होंने आगे कहा कि संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने एक ऐसा दूरदर्शी दस्तावेज प्रस्तुत किया, जो आज भी लोकतंत्र की मजबूत नींव है और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा, जागरूकता और संगठित प्रयासों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। जब हम एक विकसित और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तब बाबासाहेब के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका संघर्ष और दर्शन हमें अन्याय, असमानता और भेदभाव के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। डॉ. अंबेडकर का प्रेरणादायक जीवन और उनके आदर्श हमें हमेशा एक न्यायपूर्ण, समरस और सशक्त भारत के निर्माण के लिए मार्गदर्शन करते रहेंगे।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की जन्म-जयंती पर उन्हें सादर नमन। वे भारत की सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना के एक परिवर्तनकारी शिल्पकार के रूप में जाने जाते हैं। आइए, हम उनके सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता का संकल्प लें और आपसी विश्वास और भाईचारे पर आधारित एक एकजुट, न्यायपूर्ण और करुणावान समाज का निर्माण करें।

वहीं, महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने लोक भवन में डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने मुंबई के लोक भवन में, भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर, उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवारे, लोक भवन के कर्मचारी और अधिकारी और राज्य पुलिस के जवान शामिल हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

हम उनके विचारों और आदर्शों को याद करते हैं, जो हमें एक समरस समाज की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर कौन थे?
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर भारतीय संविधान के निर्माता और सामाजिक न्याय के अग्रदूत थे।
डॉ. अंबेडकर की जयंती कब मनाई जाती है?
डॉ. अंबेडकर की जयंती हर वर्ष 14 अप्रैल को मनाई जाती है।
डॉ. अंबेडकर का मुख्य योगदान क्या है?
उनका मुख्य योगदान भारतीय संविधान के निर्माण में और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष में है।
डॉ. अंबेडकर के विचार आज के समाज में कैसे प्रासंगिक हैं?
उनके विचार समानता, स्वतंत्रता, और सामाजिक न्याय की दिशा में आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।
कैसे हम डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों का पालन कर सकते हैं?
हम उनके सिद्धांतों का पालन शिक्षा, जागरूकता, और सामाजिक एकजुटता के माध्यम से कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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