क्या विशेष वर्ग का वर्चस्व और मुसलमानों का अपमान स्वीकार्य है?: मौलाना महमूद मदनी

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क्या विशेष वर्ग का वर्चस्व और मुसलमानों का अपमान स्वीकार्य है?: मौलाना महमूद मदनी

सारांश

भोपाल में जमीयत उलमा-ए-हिंद की सभा ने वक्फ संशोधन अधिनियम, लव जिहाद और इस्लामोफोबिया जैसे मुद्दों पर चर्चा की। मौलाना महमूद मदनी ने विशेष वर्ग के वर्चस्व पर चिंता व्यक्त की और धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा की बात की। जानिए इस महत्वपूर्ण सभा में क्या कुछ कहा गया।

Key Takeaways

  • इस्लामोफोबिया और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा
  • धर्मांतरण कानून में संशोधन की आलोचना
  • जिहाद के पवित्र अर्थ को समझाना
  • धर्म की रक्षा का संकल्प
  • मदरसों की पारदर्शिता और उनके महत्व पर जोर

भोपाल, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भोपाल में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी की अध्यक्षता में शनिवार को प्रबंधन कमेटी की सभा आयोजित हुई, जिसमें वक्फ संशोधन अधिनियम, इस्लामोफोबिया, तथाकथित लव जिहाद, मदरसों की सुरक्षा, इस्लामी माहौल में आधुनिक शिक्षा, समान नागरिक संहिता और फिलिस्तीन में जारी नरसंहार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट विचार विमर्श किया गया। इस बैठक में देशभर से प्रबंधन कमेटी के 1500 सदस्यों ने भाग लिया।

सुबह के पहले सत्र में मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि देश की वर्तमान परिस्थितियां बहुत ही संवेदनशील और चिंताजनक हैं। यह अत्यंत दुखद है कि एक विशेष वर्ग का वर्चस्व स्थापित करने और अन्य वर्गों को कानूनी रूप से मजबूर, सामाजिक रूप से अलग-थलग करने और आर्थिक रूप से अपमानित करने के लिए आर्थिक बहिष्कार, बुलडोजर कार्रवाई, मॉब लिंचिंग जैसे प्रयास नियमित रूप से किए जा रहे हैं।

मौलाना मदनी ने धर्मांतरण कानून की आलोचना करते हुए कहा कि संविधान हमें अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की अनुमति देता है, लेकिन इस कानून में संशोधन कर इस मौलिक अधिकार को खत्म किया जा रहा है।

उन्होंने 'लव जिहाद' जैसी मनगढ़ंत अवधारणा पर गहरी निराशा व्यक्त की और कहा कि इस्लाम विरोधी तत्वों ने जिहाद जैसे पवित्र शब्द का अपमान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिहाद केवल एक संगठित राज्य द्वारा ही किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, इसलिए यहां जिहाद के नाम पर किसी भी बहस की गुंजाइश नहीं है। मौलाना मदनी ने यह भी बताया कि इस्लाम के अनुसार 'जिहाद-ए-अकबर' का अर्थ अपने भीतर की बुराइयों से लड़ना है।

इस अवसर पर दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने तजकिया नफ्स (आत्म शुद्धि) पर चर्चा की और कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य धर्म की रक्षा करना है।

इस बैठक में जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी ने भी मदरसों पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि भारतीय मुसलमान कभी भी देश विरोधी तत्वों के साथ नहीं रहे हैं।

Point of View

मौलाना महमूद मदनी की बातें गंभीरता से सुनने की आवश्यकता है। यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने देश में धर्मनिरपेक्षता और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें। हमें सभी सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए और किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ खड़े होना चाहिए।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

जमीयत उलमा-ए-हिंद की सभा में कौन से मुद्दे उठाए गए?
सभा में वक्फ संशोधन अधिनियम, इस्लामोफोबिया, लव जिहाद, मदरसों की सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
मौलाना महमूद मदनी ने धर्मांतरण कानून पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि संविधान हमें अपने धर्म का पालन करने की अनुमति देता है, लेकिन धर्मांतरण कानून में संशोधन करके इस अधिकार को खत्म किया जा रहा है।
क्या भारत में जिहाद की बहस होनी चाहिए?
मौलाना मदनी ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यहां जिहाद के नाम पर कोई बहस नहीं होनी चाहिए।
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