क्या कॉलेज प्रशासन के अधिकारी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सामने पेश होंगे?
सारांश
Key Takeaways
- धर्मशाला कॉलेज में छात्र की मौत की जांच हो रही है।
- यूजीसी की जांच समिति कॉलेज प्रशासन के अधिकारियों से मिलेगी।
- छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
- समिति सात दिनों में रिपोर्ट पेश करेगी।
- कॉलेज की व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। धर्मशाला कॉलेज प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को यूजीसी की पांच सदस्यीय जांच समिति के समक्ष पेश होना अनिवार्य है। यह समिति कॉलेज के एक छात्र की मौत की जांच कर रही है। यूजीसी के अनुसार, समिति मौके पर जाकर एक प्रत्यक्ष निरीक्षण करने वाली है। इस दौरान समिति यह सुनिश्चित करेगी कि धर्मशाला स्थित कॉलेज के दस्तावेजों में प्रस्तुत व्यवस्थाएं वास्तव में जमीन पर लागू हैं या नहीं। इसके लिए यूजीसी की यह विशेष समिति यहां शिक्षकों, कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारियों और कॉलेज के स्टाफ से बातचीत करेगी। इसके साथ ही, संस्थान की मौजूदा संस्कृति और छात्रों के अनुभव के आधार पर संभावित चुनौतियों का आकलन भी किया जाएगा।
Bता दें कि धर्मशाला के सरकारी डिग्री कॉलेज में 26 दिसंबर को हुई छात्र की मौत की व्यापक जांच के लिए यूजीसी ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी और सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस समिति की अध्यक्षता प्रो. राज कुमार मित्तल कर रहे हैं। उनके अलावा इसमें तीन सदस्य और एक समन्वयक शामिल हैं।
यूजीसी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा है कि छात्रों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। दोषियों का पता लगाने और संभावित लापरवाही का पता लगाने के लिए समिति धर्मशाला स्थित सरकारी कॉलेज पहुंच रही है। यहां समिति यह जांचेगी कि कॉलेज ने यूजीसी नियमों का पालन किस हद तक किया है। यहां समिति यूजीसी रैगिंग रोधी विनियम और यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण संबंधी विनियमों की जांच करेगी। समिति पता लगाएगी कि इन नियमों को ढंग से लागू किया गया था या नहीं। साथ ही यहां शिक्षकों और छात्रों से बातचीत करके यह भी पता लगाया जाएगा कि कॉलेज में छात्रों की शिकायत निवारण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
घटना से जुड़े हालातों की जांच करने के लिए समिति यह देखेगी कि कॉलेज में उपलब्ध नीतियां कितनी प्रभावी थीं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि कॉलेज ने एंटी-हैरसमेंट उपाय किए थे या नहीं और कॉलेज की छात्र सहायता प्रणाली कितनी सक्रिय थी। समिति की एक बड़ी जिम्मेदारी यह पता लगाना है कि घटना के समय क्या चूक या गलतियां हुई हैं। वास्तव में, इस जांच के जरिए भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सुझाव भी दिए जा सकते हैं।
समिति इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस उपायों की अनुशंसा करेगी और अन्य संबंधित पहलुओं की भी जांच कर सकती है। वहीं, यूजीसी का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।