क्या फडणवीस और शिंदे को यूएलसी घोटाले में फंसाने की साजिश हुई थी?
सारांश
Key Takeaways
- संजय पांडे की साजिश के तहत फडणवीस और शिंदे को फंसाने का प्रयास किया गया।
- यूएलसी घोटाला 1976 के कानून से संबंधित है।
- भ्रष्टाचार के कारण राज्य को करोड़ों का नुकसान हुआ।
- बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे गंभीरतम घोटालों में से एक माना।
- जांच एजेंसियां सक्रिय रूप से इस मामले पर काम कर रही हैं।
मुंबई, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस विभाग में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पूर्व पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (यूएलसी) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।
यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है। इसमें कहा गया है कि संजय पांडे ने ठाणे के डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देशित किया था कि वे 2016 के यूएलसी मामले में फडणवीस और शिंदे को आरोपी के रूप में पेश करें और दिखाएं कि उन्होंने बिल्डरों से अवैध वसूली की है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेखित है कि एसीपी सरदार पाटिल पर फडणवीस और शिंदे को गिरफ्तार करने का दबाव बनाया गया। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय पुनामिया ने जांच एजेंसियों को एक ऑडियो क्लिप भी दी है, जिसमें कथित तौर पर संजय पांडे, लक्ष्मीकांत पाटिल और सरदार पाटिल के बीच फडणवीस को फंसाने की बातचीत सुनाई देती है।
महाराष्ट्र अर्बन लैंड सीलिंग स्कैम, 1976 के शहरी भूमि अधिग्रहण कानून से संबंधित है। इस कानून के तहत 500 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन वाले शहरी इलाके सरकार के अधीन आते थे, ताकि सार्वजनिक उपयोग के लिए जमीन का सही प्रबंधन हो सके। जमीन मालिकों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार हुआ। जमीन मालिकों ने फर्जी दस्तावेज बनाए और यूएलसी के माध्यम से गलत प्रमाणपत्र प्राप्त किए, जिससे उनकी संपत्ति सरकारी अधिग्रहण से बाहर हो गई। इस घोटाले ने राज्य को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे अब तक के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक करार दिया है। पुलिस ने कई गिरफ्तारियां भी की हैं और जांच जारी है। आशा की जा रही है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी ताकि भविष्य में ऐसे भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके।