क्या गणतंत्र दिवस समारोह में पूर्वोत्तर की भावना झलकी? : हिमंत बिस्वा सरमा

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क्या गणतंत्र दिवस समारोह में पूर्वोत्तर की भावना झलकी? : हिमंत बिस्वा सरमा

सारांश

गणतंत्र दिवस समारोह ने असम की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह समारोह पूर्वोत्तर की भावना को सशक्त बनाता है। असम की झांकी में शिल्प गांव अशारीकांडी की टेराकोटा परंपरा प्रदर्शित की गई, जो गर्व का क्षण है।

Key Takeaways

  • गणतंत्र दिवस परेड में असम की सांस्कृतिक झांकी प्रदर्शित की गई।
  • मुख्यमंत्री ने इसे गर्व का क्षण बताया।
  • अशारीकांडी की टेराकोटा परंपरा को दर्शाया गया।
  • समारोह ने पूर्वोत्तर की भावना को उजागर किया।
  • आत्मनिर्भरता और स्थानीय शिल्पकला को बढ़ावा दिया गया।

गुवाहाटी, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में पूर्वोत्तर की भावना सही मायने में प्रदर्शित हुई, जिसमें कर्तव्य पथ पर असम की संस्कृति और विरासत को प्रमुखता दी गई।

77वें गणतंत्र दिवस परेड में राज्य की झांकी पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में असम के रंग पूरी तरह से प्रदर्शित हुए और इसे राज्य के लोगों के लिए गर्व का क्षण बताया।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “इस वर्ष का गणतंत्र दिवस पूर्वोत्तर और असम के जोश का उत्सव था। कल नई दिल्ली में असम के रंग पूरी तरह से प्रदर्शित हुए। गर्व का क्षण।”

असम की झांकी में धुबरी जिले के प्रसिद्ध शिल्प गांव अशारीकांडी की समृद्ध टेराकोटा परंपरा को प्रदर्शित किया गया, जो राज्य की गहरी कलात्मक विरासत और नदी-तटीय संस्कृति को उजागर करता है।

आत्मनिर्भरता और स्वदेशी शिल्प कौशल की थीम पर आधारित इस झांकी में प्रकृति, ग्रामीण जीवन और ब्रह्मपुत्र के सांस्कृतिक परिदृश्य से प्रेरित जटिल टेराकोटा रूपांकनों को दर्शाया गया था।

हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल कर चुकी शारीकांडी की टेराकोटा शिल्पकला, असम की सदियों पुरानी मिट्टी की कला की परंपरा का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है। झांकी में कारीगरों को काम करते हुए दिखाया गया, साथ ही लोक जीवन की मूर्तिकलात्मक प्रस्तुतियां भी थीं, जो परंपरा, स्थिरता और सांस्कृतिक गौरव के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण को दर्शाती हैं।

अधिकारियों ने कहा कि झांकी का उद्देश्य असम को न केवल प्राकृतिक सौंदर्य के भंडार के रूप में, बल्कि जीवंत परंपराओं के केंद्र के रूप में भी प्रस्तुत करना था, जो सामुदायिक भागीदारी और सरकारी सहयोग से फल-फूल रही हैं।

शारीकांडी को शामिल करना स्थानीय शिल्पकला को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका को प्रोत्साहित करने का एक प्रयास भी माना गया।

इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे भारत की सांस्कृतिक और विकासात्मक गाथा में उनकी बढ़ती भूमिका रेखांकित हुई। असम की झांकी ने अपने जीवंत रंगों, बारीक कारीगरी और प्रामाणिक कहानी कहने के अंदाज के लिए दर्शकों और गणमान्य व्यक्तियों दोनों का दिल जीत लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर असम की विरासत को मिली यह मान्यता राज्य भर के कारीगरों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करेगी, साथ ही आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में योगदान देगी।

Point of View

यह स्पष्ट है कि असम की सांस्कृतिक विरासत को मान्यता मिलना न केवल स्थानीय कारीगरों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह समारोह भारत की विविधता और समृद्धि को दर्शाता है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

गणतंत्र दिवस समारोह में असम की झांकी का क्या महत्व है?
असम की झांकी ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत और शिल्प कौशल को प्रदर्शित किया, जो आत्मनिर्भरता और जीवंत परंपराओं का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि इस वर्ष का गणतंत्र दिवस असम और पूर्वोत्तर की भावना का उत्सव है और इसे गर्व का क्षण बताया।
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